महावीर बनकर दिखाएँ

महापुरुष, अवतार और देवी-देवताओं से लेकर परमात्मा की शक्तियाँ और दिव्यताएँ पूरी तरह आत्मसात  करने और उनके अनुरूप जीवन को ढालने के लिए हैं। उत्सव-पर्व, जयंतियां, निर्वाण दिवस और साल भर चलते रहने वाले आयोजनों का यही मकसद है ताकि ऊध्र्वदैहिक यात्रा के लिए जरूरी जीवनीशक्ति, 20160418205159सद्चरित्र और कल्याणकारी प्रेरणाओं का संचरण अनवरत पूरे प्रवाह के साथ बना रहे और सृष्टि युगों तक सत्यं-शिवं-सुन्दरं का प्रत्यक्ष दर्शन कराती रहकर ईश्वरीय शक्तियों का जयगान करती रहे।

भगवान का नाम लेने का तब तक कोई औचित्य नहीं है जब तक कि हम सभी लोग भगवान के स्वभाव, उनके उपदेशों और जीवन व्यवहार को अपने जीवन में न उतार पाएं। केवल जयकारे लगाने, पालकी और रथयात्रा निकालने, पूजा-पाठ और अनुष्ठानों आदि से कुछ नहीं होने वाला। ये सारे संस्कार और परंपराएं हमें निरन्तर इस बात का अहसास कराती हैं कि ईश्वरीय शक्तियों से प्रेरणा प्राप्त कर अपने जीवन को भी उसी अनुरूप विकसित करें। दैवत्व और दिव्यत्व का भरपूर आवाहन करते हुए जिन्दगी को इस प्रकार सँवारना है कि हम भी ईश्वरीय कार्यों में मददगार की भूमिका निभाने की पात्रता प्राप्त कर सकें और जगत का कल्याण कर सकें।

हर श्रद्धालु भक्त या उपासक का यह धर्म है कि वह उपास्य देव की शक्तियों और स्वभाव को परिपूर्णता के साथ अंगीकार करे व उसी का जीवन पर्यन्त अनुसरण करता रहे और अंत में भगवान में विलीन हो जाए।  इस दृष्टि से हमारे जीवन का लक्ष्य उपास्य देव के अनुरूप अपने आपको बनाने का होना चाहिए तभी अनन्य भक्ति का वास्तविक स्वरूप और लक्ष्य साकार होकर सामने आ सकता है।

भगवान भी यही चाहता है कि जिन लोगों को उसने धरती पर मनुष्य के रूप में पैदा किया है वे सभी लोग भगवान के कामों में जुटे रहकर सृष्टि के कल्याण में भागीदार बनें न कि ईश्वरीय विधान को खण्डित करते हुए अपनी ही अपनी हाँकते रहें और किसी प्रलोभन, भटकाव या दबाव में आकर अपने रास्ते बदल लें। भगवान महावीर स्वामी ने जिन सिद्धान्तों भरे उपदेश दिए हैं उनका पालन करना हम सभी आरंभ कर दें तो यह धरती कुछ ही दिन में स्वर्ग बन जाए।

लेकिन हम लोग स्वार्थों और षड़यंत्रों, तुच्छ कामनाओं और भोग-विलासी प्रवृत्तियों में इतने अधिक रमते जा रहे हैं कि हमें शाश्वत आनंद और आत्मतोष के तत्वों को जानने की न जिज्ञासा रही है, न प्रयत्न करने को उत्सुक हैं।

महावीर केवल वाणी, प्रचार और कर्मकाण्ड का विषय नहीं हैं, महावीर अपने आप मेंं पुरुषार्थ से परमात्मा, त्याग-तपस्या से तेजस्वी बनने और जीवन में दिव्यता के शिखरों का स्पर्श कराने वाले भगवान हैं जिनकी एक भी शिक्षा हम मान लें तो जीवन धन्य हो जाए। वर्तमान की सारी समस्याओं का हल महावीर की वाणी में है लेकिन हम अपनाएं तब न। अपरिग्रह, अस्तेय, जियो और जीने दो, अहिंसा परमो धर्म आदि को जीवन में उतारने की आवश्यकता है ताकि यह धरा महावीरत्व से इतनी भर उठे कि कहीं कोई समस्या और अभाव न रहे, सर्वत्र सुख-शांति, आत्मतोष और आनंद की सरिताएं बहती रहें। महावीर को अपना कर महावीर बनने के लिए जीवन समर्पित करने की याद दिलाती है आज की यह महावीर जयन्ती।  सभी को महावीर जयन्ती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं …।