सावधान रहें श्रेय लूटने वालों से

आजकल काम करने वालों से अधिक संख्या में वे लोग हैं जो कि हर काम का श्रेय लूटने वाले हैं। ये लोग पुरुषार्थ की बजाय औरों के काम के श्रेय पर डकैती डालने में माहिर हैं।

कुछ लोगों की यह किस्म ही ऎसी है कि जो उन सभी कामों का श्रेय चुरा लेती है जिन कामों से उनका कोई संबंध तक नहीं होता, और जो काम न उन्होंने किए हों, न उनकी सात पुश्तों ने की हो।

दुनिया में सभी स्थानों पर  इस तरह के लोगों की भरमार है जो कि बिना कोई काम किए इससे यश पाना चाहते हैं। और केवल श्रेय ही नहीं बल्कि उन कामों से अपने जीवन से संबंधित सभी प्रकार के लाभों को पाने में पीछे नहीं रहते।

और लाभ भी न मिल पाए तो ये लोग यह तो चाहते ही हैं कि उन्हें धन्यवाद प्राप्त हो। यानि की बिना काम-काज किए किस प्रकार हर काम का श्रेय अपनी झोली में भर लेने के सारे जतन ये करते रहते हैं।

दुनिया भर में निकम्मों और कर्मशील इंसानों को यह संघर्ष कोई नया नहीं है बल्कि हर युग में रहा है। यह अलग बात है कि इनका स्वरूप परिवर्तित रहा है। किसी जमाने में या दशकों पहले बड़े-बड़े कामों का श्रेय लिया जाता था। आजकल छोटे  से छोटे काम का श्रेय पाने के लिए लोग बेचैन और उतावले रहने लगे हैं। लगभग हर जगह ऎसे लोग मिल जाया करते हैं जो कि खुद कुछ नहीं करते, कोई न कोई जुगाड़ भिड़ा कर काम करने वाले लोगों के साथ हो जाया करते हैं और दर्शाते ऎसे हैं जैसे कि वे ही सारे काम कर रहे हों।

हर बाड़े और गलियारे में ऎसे लोगों की कोई कमी नहीं है। इन लोगों के बारे में सहकर्मियों और दूसरे आम लोगों की भी धारणा यही होती है ये नालायक और निकम्मे लोग कोई काम-धाम न जानते हैं, न करते हैं लेकिन दूसरे लोगों द्वारा किए जाने वाले अच्छे लोगों के कामों को अपना काम बताकर श्रेय लूटने की हरचंद कोशिश करते रहते हैं। दुनिया के अधिकांश कर्मयोगी इन लोगों की हरकतों से परेशान हैं और चाहते हैं कि इन लोगों से दूरी बनाए रखें लेकिन ऊपरी दबाव और निकम्मे लोगों की अपने से बड़े निकम्मों के साथ सांठ-गांठ की वजह से कुछ नहीं हो पा रहा है।

किसी भी काम का श्रेय किसी भी लोभ-लालच में किसी और को न दें, इसी वजह से समाज में कामचोरी बढ़ती जा रही है और इस वजह से कर्मयोगियों के कामों का असली मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है।  जो लोग काम करने वाले हैं उन लोगों को चाहिए कि वे ऎसे लोगों से दूर रहें जो श्रेय के लूटेरे हैं।