भौंकने वाले करमचारी

जिस दफ्तर में जो इंसान जोरों से बातें करता या चिल्लाता रहता है, समझ लो वह पहले जन्म में इसी बाड़े का कार्मिक या श्वान रहा होगा।

देश-दुनिया में नाकाराओं, नुगरों और मुफ्तखोरों की बढ़ती जा रही विस्फोटक संख्या पृथ्वी के लिए शुभ संकेत नहीं है।

बातूनी, चिल्लाने वाले और माथे पड़ने वाले लोगों की हरकतें, करतूतें और शरारतें बर्दाश्तगी के बाहर होती जा रही हैं।

सज्जनों और कर्मयोगियों का धैर्य, सहिष्णुता और सहनशीलता अब समाप्त होती जा रही है, हो भी क्यों न, जब सब तरफ हरामखोरों और लूटेरों की धींगामस्ती चरम पर हो।

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