इसलिए उठती है स्वाद की तलब, जगता है आकर्षण

हम जिस प्रकार के खान-पान का स्वाद रोजाना लेते हैं उनसे एकदक अलग हटकर यदि स्वाद आ जाता है तब शरीर की सभी लार ग्रंथियां अत्यधिक सक्रिय होकर उत्तेजना पैदा करने लगती हैं और इसका शरीर को अजीब सा नया आनंद प्राप्त होता है। यही कारण है कि अन्यतम आनंद की प्राप्ति हमारे आकर्षण को बढ़ा देती है। इसीलिए यह सुना जाता है कि अमुक दुकान पर खूब भीड़ लगती है, उसके वहां की खान-पान सामग्री का कोई मुकाबला नहीं। ग्राहकों में तलब को पैदा करने और उसे बनाए  रखने के लिए कई दुकानदार अपनी दुकान पर बेची जाने वाली खान-पान की सामग्री में ऎसा कुछ मिला देते हैं जिससे कि ग्राहकों की जीभ और लार ग्रंथियां अजीब से स्वाद का अनुभव कर इसकी अभ्यस्त हो जाएं। जैसे कि शाकाहारी लोगों के खान-पान में माँसाहारी मसाले या तरी मिला दी जाती है और खान-पान में ऎसे अजीब किस्म के केमिकल मिला दिए जाते हैं जिनसे कि शरीर तीव्रता से रियेक्ट करे।

खासकर चाय, कचोरी-समोसे, गोल-गप्पे और तमाम प्रकार के फास्ट फूड़ बनाने वालों पर अनुसंधान किया जाए तो कई लोग ऎसे सामने आएंगे जिनके खान-पान में कोई न कोई विजातीय द्रव्य मिला हुआ होता है जो कि सामान्यतया उपलब्ध नहीं होता अथवा उसके स्वाद से आम इंसान परिचित नहीं होता। इनकी दुकानों के चल निकलने और भीड़ का यही कारण होता है न कि इनका भाग्य या और कुछ। जहाँ विलक्षण स्वाद की तलब वालों की भीड़ देखी जाए वहाँ उनकी खान-पान सामग्री की जाँच की जानी चाहिए।