अप्रेल फूल जिन्दाबाद

अप्रेल फूल को हम चाहे विदेशी उपज कहकर उपहास उड़ायें, इसे निरर्थक और हास्यास्पद मानें और इसकी बुराई करते रहें मगर हमारे लिए यह शाश्वत और सनातन सत्य के रूप में स्वीकार किया जाना ठीक होगा।

अन्तर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस को हम केवल एक ही दिन मनाकर इतिश्री कर लेते हैं और अगले साल तक के लिए एक अप्रेल को भूल जाते हैं लेकिन सत्य यह है कि हमारे लिए हर दिन अप्रेल फूल की तरह ही है।

जिओ और जीने दो को हम भुला चुके हैं और इसकी जगह आ गया  मूर्ख बनते रहो और बनाते रहो। करोड़ों की भीड़ में कुछ फीसदी लोगों को छोड़ दिया जाए तो हम सभी लोगों की जिन्दगी ही एक-दूसरे को मूर्ख बनाने के आधार पर ही चल रही है।

एक-दूसरे को मूर्ख बनाकर हम अपने उल्लू सीधे करते रहे हैं। हमारी खुशी के लिए किसी बड़े पैमान की कोई जरूरत नहीं हुआ करती। हम किसी को मूर्ख बनाकर जितने खुश होते हैं उतने और किसी अच्छे कर्म से नहीं।

न मूर्ख बनने वालों की कमी है, न बनाने वालों की।  मूर्ख बनने वाले नासमझ जरूर हो सकते हैं लेकिन मूर्ख बनाने वाले नहीं। मूर्ख बनाने वालों के लिए औरों को भ्रमित कर मूर्ख बनाना और हमेशा-हमेशा के लिए उन्हें मूर्ख बनाए रखना जीवन लक्ष्य में सफलता पाने का बहुत बड़ा सूत्र हो चुका है। जब तक मूर्ख बनने वालों की भीड़ बनी रहेगी, तब तक दुनिया में मूर्ख बनाने वालों का वजूद,  आदर-सम्मान और श्रद्धा कायम रहेगी।

कुछ लोग तो सायास मूर्ख बनाए रखने के लिए जो जतन करते हैं वे मूर्खता की पोथी में स्वर्णाक्षरों में अंकित किए जाने लायक हैं। हमारे आस-पास भी खूब सारे हैं जो हमें भी मूर्ख बनाते रहते हैं। और हम हैं कि सब कुछ जानते-बूझते हुए भी उनके प्रति आदर-सम्मान और श्रद्धा भाव रखते हुए महामूर्खों की तरह पेश आते हैं और अपने आपको तथा पुरखों को पूरी बेशर्मी के साथ लजाते हैंं।

भाग्यशालियों के बारे में कहा जाता है कि उनके लिए भूत कमाते हैं। अब भूत रहे नहीं, या इंसानों के भय से गायब हो गए लगते हैं लेकिन भूतों का स्थान ले लिया है मूर्खों ने। ये मूर्ख न होते तो क्या होता? मूरख बनाने वाले मतिमान लोगों की जिन्दगी ही अभावों और समस्याओं के अंधेरों से घिर कर रह जाती।

हम चाहे कितनी ही ईमानदारी, सच्चाई और निष्ठा की बातें करें, सत्यमेव जयते के नारे लगाएं, किन्तु हमारी आत्मा ही यह जानती है कि हम जो कुछ कर रहे हैं वह कितना फीसदी सच है।

हम अपने आपको होशियार, चतुर-चालाक और दूसरों से अलग समझने – समझाने के लिए जिस तरह झूठ का सहारा ले रहे हैं, लोगों को उनके काम-काज को लेकर आज-कल परसों करते हैं, झाँसे देते हैं, भरमाते हैं, कोरे ऊपरी आश्वासन देते हैं और जी भर कर लफ्फाजी करते हुए  लोगों को भ्रमित करते रहते हैं, यह सब मूर्ख बनाने की कला का एक हिस्सा ही तो है।

और तो और हम मूर्ख बनाने में इतने अधिक शातिर हो चले हैं कि हमारा दिमाग दिल को, दिल दिमाग को, एक अंग दूसरे अंग को मूर्ख बनाने लगा है।  मूर्ख बनाने के विज्ञान में हमसे बड़ा प्रयोगधर्मा और कौन होगा। हम अपने माँ-बाप, भाई-बहनों, संतानों और अपने-अपने उत्तमांगों तक को मूर्ख बनाते हुए पूरी की पूरी जिन्दगी निकाल दिया करते हैं।

दुनिया में यदि कोई दूसरों को प्रेमपूर्वक मूर्ख बनाने की कला में सिद्ध है तो वह हमारे सिवा और कोई नहीं। हम इतनी चतुराई से सामने वालों को मूर्ख बनाकर अपना हित साध लेते हैं कि सामने वालों को या तो कई जन्मों तक पता ही नहीं चलता कि उसे मूर्ख बनाया गया है।

लोगों को हम इतनी धूर्तता के साथ मूर्ख बनाते हैं कि किसी को भनक भी नहीं लगती और वे मूर्ख बनने के बावजूद उन लोगों के प्रति जिन्दगी भर कृतज्ञ बने रहते हैं जो उन्हें तथा उनकी पीढ़ियों को परंपरा से बेवकूफ बनाते हुए आ रहे हैं।

हर मूर्ख अपने आपको दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी या बुद्धिमान-विद्वान समझता है और इसी बात के लिए जिन्दगी भर हरसंभव कोशिश करता रहता है कि लोग उसे हमेशा प्रतिष्ठा नवाजते रहें, आदर-सम्मान  देते रहें।

आजकल सर्वाधिक सफल वही है जो अधिक से अधिक लोगों को गुमराह करे, झांसे देकर भ्रमित करता रहे, लल्लो-चप्पो भरी बातें कहकर टालता रहे, आश्वासनों के फूल सूंघाता रहे और लोग हमेशा इसी भ्रम में रहें कि ये अपने हैं।

बेचारे चन्द लोगों को छोड़ दिया जाए तो हम सभी के लिए अपनी जिन्दगी का हर दिन  अप्रेल फूल खिलाने वाला ही है। यह फूल ही ऎसा है जिसकी तीव्रता से पसरने वाली और तीक्ष्ण गंध भी मूर्ख बनाने में समर्थ है और इसका दर्शन भी। मूर्ख बनाने के मामले में कोई छोटा-बड़ा या अपना-पराया नहीं होता। जो जितना अधिक मूर्ख बना सकता है वह अपने आपको उतना अधिक सफल महसूस करता है और धन्य भी।

हम अपनी पूरी जिन्दगी का लेखा-जोखा याद करें और ईमानदारी से चिन्तन करें तो हमें अपने आप पर इतना अधिक गर्व हो उठेगा कि इसके भार तक को हम सहेज नहीं पाएंगे। हम जैसे सामान्य लोग जिन्दगी भर हजारों-लाखों लोगों को मूर्ख बनाते रहते हैं। फिर उन लोगों की तो बात ही क्या है जो प्रभावशाली और महान समझे जाते हैं।

बेहिसाब लोगों को मूर्ख बनाने वाले ये लोग पूरी जिन्दगी इसी खुशफहमी में निकाल दिया करते हैं कि वे उन लोगों में शुमार हैं जो अनगिनत लोगों को मूर्ख बनाने का रिकार्ड कायम कर चुके हैं, और बावजूद इसके लोग हैं कि उन्हें अब तक समझ नहीं पाए हैं। यही उनके पूरे जीवन की वह बहुत बड़ी पूंजी है जिसे वे मरने के बाद भी साथ ले जाने का मानस बनाए होते हैं।

आज का दिन हम सभी के लिए आत्मचिन्तन का दिन है। हम सभी तरह की प्रजातियों के सामान्य से लेकर विशिष्ट और अजीबोगरीब मूर्खों के लिए गर्व और गौरव गान का दिवस है।  विदेशी तो एक दिन इसे मनाकर छोड़ देते हैं और हम लोग साल भर हर दिन अप्रेल फूल की तरह मनाते हैं। यह हमारी महानता ही है कि हम उन सभी कारकों को आत्मसात कर लिया करते हैं जो कि हमारे हक में अच्छे लगते हैं।

आईये आज के दिन को ईमानदारी से स्वीकारें कि हम मूर्ख हैं और बने रहेंगे। मूर्खता को अपनाते रहना हमारा जन्मसिद्ध ही नहीं सात जन्मों का अधिकार है और हम इसे कई जन्मों  तक अपना बनाए रखेंगे। दुनिया के समस्त घोषित-अघोषित, मरे-अधमरे और जीवित मूर्खों के प्रति हार्दिक श्रद्धान्जलि …।

सभी को अप्रेल फूल की हार्दिक बधाई एवं भावी जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ….।

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