अमृत कलश

अमृत कलश

  • पितरों के संदर्भ को छोड़कर दक्षिण दिशा की ओर मुँह कर भोजन न करें।

  • अपने जूते-वाहनों आदि का मुँह (अगला सिरा) दक्षिण दिशा की ओर न रखें। इससे बीमारी और अनिष्ट की आशंका बनी रहती है।