धंधेबाजों और ज्योतिषियों की जुगलबंदी का कमाल …

अब तक तो शादी-ब्याहों के लिए कुण्डली मिला डालने जैसे कामों में ही तथाकथित ज्योतिषियों को चान्दी हो रही थी।

अब देश की आर्थिक समृद्धि में भी इन टीवी और मीडिया प्रेमी ज्योतिषियों की धमाल बढ़ती जा रही है। कंपनियां और बिजनैसी फण्डों से जुड़े लोगों ने आम जनता को मूर्ख बनाने का ब्रह्मास्त्र तलाश लिया है।दीपावली, होली, दशहरा, राखी और साल भर का कोई सा बड़ा त्योहार हो, धंधेबाज ज्योतिषियों को पकड़ लो और उनसे करवा लो भविष्यवाणियां – पुष्य का संयोग, दो-चार दूसरे योगों का सम्मिश्रण बता डालेंगे।

अब पुष्य नक्षत्र किसी भी वार में तो आएगा ही इन दिनों में। रविपुष्य, सोम पुष्य, मंगल पुष्य, बुध पुष्य, गुरु पुष्य, शुक्र पुष्य, शनि पुष्य आदि-आदि। लोग ज्योतिष पर भरोसा करते हैं, इस भरोसे को भुनाने में ज्योतिषी, पण्डित और बिजनैसी कंपनियां, प्रतिष्ठान और हमारे तमाम तरह के माध्यम भी पीछे नहीं हैं।उन्हें विज्ञापनों की कमाई का भूत दिखता है।  असली बात तो वे लोग बता सकते हैं जिन्होंने पहले के वर्षों में इन योगों में खरीदारी की हो और उन्हें जीवन में लाभ हुआ हो।

पूंजीपति लोगों को भरमाने के लिए ज्योतिष के सिवा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। भला हो इन ज्योतिषियों का जिनकी वजह से सब लोग मजे मार रहे हैं। बहुत सारे सिद्ध ज्योतिषी हैं जिनकी गणना और कही बातें सब सच निकलती हैं, लेकिन उनकी विवशता यह है कि वे बिजनैसी फण्डों वालों के झांसे में नहीं आते।

जब भी दीवाली आती है कुछ दिन पहले से ज्योतिषीय योगों को लेकर ऎसा माहौल खड़ा कर दिया जाता है कि जैसे अबकि बार जो बिजनैसी बूम और योग आएगा, ऎसा दुनिया में पहले कभी किसी दीवाली पर नहीं आया हो। क्यों न इन सभी ज्योतिषियों को भारत-पाक सीमा पर भेज दिया जाए ताकि हमारी सेना को विजय पाने के लिए गोलियां-गोले दागने का शुभ मुहूर्त दिखाते रहें।

(नोट – ज्योतिष के जरिये धंधा चलाकर सम्पत्तिशाली बनने के सफर में जुटे हुए तमाम महान एवं सिद्ध त्रिकालज्ञ ज्योतिषियों से क्षमायाचना सहित)

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