धर्म चर्चा – सदा सूतकी होते हैं ये लोग

अपने निकटतम परिजन की मृत्यु पर जो लोग मुण्डन नहीं कराते हैं वे लोग जिन्दगी भर सदा सूतकी होते हैं। इन लोगों को किसी भी दैव कर्म का कोई अधिकार नहीं होता क्योंकि इनके केश में सूतक और पाप राशि जमा रहती है।   ऎसे सदा सूतकी लोगों के साथ खान-पान और व्यवहार भी अपने संचित पुण्यों का नाश करने वाला होता है। अपने सर के बालों का भार अत्यल्प होता है फिर भी हम जब बाल कटवाते हैं तब अपने आपको कितना हल्का और तरोताजा महसूस करते हैं। इसका कारण यह है कि हमारे शरीर के पाप बालों, नाखूनों में संग्रहित होते हैं और इनकी कटाई से हल्कापन लगता है। जिन लोगों के धर्म और संन्यास परंपराओं में दाढ़ी-जटा रखने की परंपरा और धार्मिक रिवाज है उन्हें छोड़कर जो-जो लोग अपेक्षा से अधिक झींतरिये हैं, सूतक में भी बाल कटाने से परहेज रखते हैं, उन सभी प्रकार के लोगों के लिए शुचिता प्रभावित होती है और धर्महीनता की वजह से संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऎसे लोग जो भी धर्म-कर्म करते-कराते हैं उसका कोई पुण्य प्राप्त नहीं होता।  जब भी कोई सूतक प्राप्त हो मुण्डन अवश्य कराएं।