जब अकबर बादशाह को हुआ अचम्भा ….

जब अकबर बादशाह को हुआ अचम्भा ….

शहंशाहे हिन्द अकबर बादशाह के आज हरम में आने से पहले किसी ने कोई चेतावनी नहीं दी। बादशाह खासे नाराज हुए। गुस्से से तरबतर हो पूछ ही लिया – आज कोई आवाज नहीं पड़ी, कैसे पता चलेगा हरम में।

सिपहसालार ने अदब से कहा – हुजूर अब आवाज लगाकर चेतावनी देने की जरूरत नहीं है।  बेगमों, रण्डियों और रक्काशाओं के फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सअप पर ग्रुप बना दिये हैं, वहीं पोस्ट कर दिया है। सभी ने संदेश पढ़ भी लिया है।

कोमलांगियों से घिरे अकबर बादशाह पलंग पर पसर गए। पास में देखा तो आज पीकदान भी गायब था। फिर झल्ला उठे।

बड़ी बेगम ने झुककर सलाम किया और कहा – शहंशाहे हिन्द, आपके पास ये मोबाइल भी रखा है और लैपटाप भी, दोनों में फूल इन्टरनेट है।

आज की दुनिया का इससे बड़ा और आसान थूकदान और कोई नहीं है।

(नोट – मूल थीम अग्रज साहित्य चिन्तक श्री भरतचन्द्र शर्मा-बांसवाड़ा की है। केवल शब्द संयोजन ही अपना है। पढ़ने के बाद एक बार सोशल मीडिया की जय-जयकार जरूर बोलें, इसमें कंजूसी न करें।)