महारानी हो तो ऎसी …

समूचा भारतीय इतिहास राजाओ-महाराजाओं, राजकुमारों-राजकुमारियों, रानियों-महारानियों से भरा पड़ा है। इनमें भी महारानी अहिल्याबाई के लोक कल्याणकारी और सामुदायिक सेवा-उत्थान कार्यों तथा जन-जन के लिए उपयोगी संरचनाओं के निर्माण में जो अहम् योगदान रहा है उसे सदियों तक नहीं भुलाया जा सकेगा।

अहिल्याबाई के लोक मंगलकारी कर्मयोग की गूंज मेवाड़ में भी दूर-दूर तक पसरी हुई है। आज भी उनके नाम का एक सुन्दर जल कुण्ड राजसमन्द जिले के नाथद्वारा में अवस्थित है और उसी कुण्ड के नाम से है पूरे इलाके का नाम। यह भी संभव है कि इसका नामकरण देवी अहिल्या के नाम पर भी हो।

ऎतिहासिक दृष्टि से इसका अतीत कुछ भी रहा है, यह इतिहासकारों का विषय है लेकिन वैष्णव भक्तों के लिए अहिल्या के नाम से स्थापित इस कुण्ड का धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व रहा है। इसके पुनरुत्थान व विकास की आज आवश्यकता है।

वैष्णवों के महान तीर्थधाम श्री नाथद्वारा में प्राचीन कालीन अहिल्या कुण्ड है जो इतना व्यवस्थित ढंग से बना हुआ है कि इसमें भक्त स्नानार्थियों के नहाने के लिए सीढ़ियों के साथ ही स्नानोपरान्त वस्त्र परिवर्तन के लिए कुण्ड के साथ ही मेहराबदार कक्ष बने हुए हैं। यहीं पर भगवान भोलेनाथ का मन्दिर तथा अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं।

हालांकि अब इस कुण्ड का पानी गंदा हो चला है। इस कुण्ड की साफ-सफाई कर व्यवस्थित कर दिया जाए तो यह बहु उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

यह तो इतिहासकार ही बता सकते हैं कि इस कुण्ड का निर्माण महारानी अहिल्याबाई ने करवाया या उनकी स्मृति में किसी ने। मगर यह यथार्थ है कि इस तरह के जनसेवी कार्यों की बदौलत अहिल्याबाई आज भी अमर हैं। प्रभु श्रीनाथजी के भक्तों की सेवा में किए गए उनके इस पुण्य की बदौलत ही महारानी अहिल्याबाई भगवान श्रीकृष्ण के गोलोक धाम में हैं।

राज परिवार और राजधर्म से जुड़े राजाओं और रानियों को भी होना चाहिए कि वे इसी प्रकार के लोकसेवी और सामुदायिक कल्याण कार्यों में आत्मीय रुचि लेकर मानवीय उदारतापूर्वक भागीदारी निभाएं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें गर्व के साथ याद कर सकें।

महारानी अहिल्याबाई की जयन्ती पर कोटि-कोटि नमन, हार्दिक श्रद्धान्जलि।

Ahilya Kund ShreeNathdwara

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