Monthly Archives: January 2018

मनोरोग के लक्षण हैं चिल्लाना-झल्लाना

वजह हो या फिर बेवजह ही चिल्लाना, झल्लाना, आक्रामक होकर माथे पड़ना और हिंसक स्वभाव को अपना लेने की आदत पालने वाले लोगों के बारे में कहा जा सकता है कि वे पूर्ण इंसान न होकर आधे-अधूरे होते हैं और उनका मन-मस्तिष्क मैला तथा शरीर अपवित्र होता है। इस कारण से उनके भीतर से इंसानियत, धैर्य, गांभीर्य और मानवीय संवेदनशीलता ... Read More »

विमर्श – राजस्थानी भाषा के आग्रह को छोड़कर हिन्दी पर ध्यान देना चाहिए

राजस्थान प्रदेश में हर थोड़े-थोड़े समय के बाद राजस्थानी भाषा के नाम पर कुछ न कुछ होता रहा है। खासकर शिक्षा और साहित्य से जुड़े लोगों का एक वर्ग इस बारे में किसी न किसी प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से राजस्थानी को भाषा का दर्जा देने और पूरे राजस्थान पर राजस्थानी (मारवाड़ी) भाषा थोंपने के लिए प्रयास करता रहा है। इसमें ... Read More »

व्हाट्सअपिया कचरा पात्र

कहा जाता है कि ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, उसका केवल रूपान्तरण होता है और इसी प्रक्रिया का असर सृजन या संहार के रूप में सामने आता है। समय की नब्ज़ को जानने-पहचानने वाले विवेकवान, ज्ञानी और अनुभवी लोग इस ऊर्जा को स्वयं तथा सृष्टि के कल्याण में लगाते हैं जबकि टाईमपास के लिए ही पैदा हो गए या कि ... Read More »

आत्म आनन्द चाहें, तो दिखावा त्यागें

जिन्दगी भर हम सैकड़ों-हजारों कर्म करते रहते हैं फिर भी बुढ़ापे तक आते-आते न आत्मसंतोष की अनुभूति कर पाते हैं और न ही आनंद की। अधिकांश लोग जिस आनंद को पाने की आकांक्षा रखते हैं उसे मरते दम तक प्राप्त नहीं कर पाते। इनके लिए क्षणिक आनंद का अहसास कराने के बाद फिर जैसे थे वैसे ही हो जाने की ... Read More »

अवसर दें युवाओं को

स्वामी विवेकानंद जयन्ती के दिन हमें युवाओं की खूब याद आती है। इस दिन युवाओं की ही चर्चा होती है और युवाओं के उत्थान से जुड़े आयोजनों की परंपरा रही है। बरसों से हम यही सब कुछ करते आ रहे हैं। कभी स्वामी विवेकानंद के जयघोष लगाने में हम आगे ही आगे रहते हैं और कभी थोड़ा पीछे हट जाते ... Read More »

वास्तु चर्चा – अभिशप्त होते हैं ऎसे भवन और परिसर

धरती कभी खराब नहीं होती और न ही अशुद्ध होती है। इसे बिगाड़ने, अशुद्ध और प्रदूषित करने का काम इंसान ही करते हैं। वे सारे स्थल तब तक शुद्ध बने रहते हैं जब तक कि इंसान की पहुुंच वहां तक नहीं हो पाती है। जैसे ही किसी स्थान पर इंसानी प्रजाति की कोई सी इकाई पहुंच जाती है वैसे ही ... Read More »

ये न हों तो, जीने का मजा ही क्या

एकरसता भरा जीवन हमेशा एकतानता से इतना अधिक भरा हुआ रहता है कि किसी को जीने का कोई मजा ही नहीं आ सकता। यही कारण है कि भगवान ने हर क्षण को परिवर्तनशील बनाया है और यह परिवर्तन पिण्ड से लेकर ब्रह्माण्ड तक को प्रभावित करता है। जो बदलाव ब्रह्माण्ड में आते हैं वे जीव मात्र या प्रकृति के किसी ... Read More »

शराब मुक्त भारत के लिए यह है जरूरी …

हम सभी लोग शराब या मदिरा की बुराई करते हैं, सब सार्वजनिक तौर पर शराब बन्दी की बात करते हैं, लेकिन शराबियों के विरूद्ध़ कुछ भी कहने का साहस नहीं रखते, यही कारण है कि शराब का प्रचलन लोक मान्यता पाता जा रहा है। हालात ये हैं कि हर जाति-वर्ग और क्षेत्र के लोगों की शादियों में बाराती प्रोसेशन के ... Read More »

न युग सुधरेगा, न हम

बरसों से कहा जाता रहा है- हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा। पर दशकों बाद भी यह उक्ति सार्थक नहीं हो पायी है और आज भी हम वहीं के वहीं ठहरे हुए हैं, न सुधर पाए हैं, न किसी को सुधार। बचपन से लेकर पचपन तक की बात हो या फिर साठ पार से लेकर शतायु पार तक के लोगों की। कोई ... Read More »

– राजसमन्द परिक्रमा – सिद्धों का डेरा – साधकों का बसेरा, गुप्त साधनाओं का जागृत धाम उदासीन धूँणी

धर्म धामों से भरे भारतवर्ष में हर क्षेत्र में लोक श्रद्धा के प्राचीन आस्था धाम विद्यमान हैं जिनके प्रति स्थानीयों से लेकर दूर-दूर तक भक्तों की भावनाएं जुड़ी रही हैं। प्रभु श्रीनाथजी की नगरी श्रीनाथद्वारा भी धर्मधामों का गढ़ रहा है जहाँ खूब सारे श्रद्धास्थल मौजूद हैं और इनके प्रति धर्मावलम्बियों की गहरी आस्था रही है। इन्हीं में एक है ... Read More »