Monthly Archives: December 2017

नहीं है मरने की फुरसत

खूब सारे लोग हैं जो कोई सा काम बता दो, छूटते ही कह डालेंगे – इतने सारे काम पहले से ही हैं कि मरने की फुरसत नहीं है। जो यह जुमला कहने का आदी है उसके बारे में साफ-साफ जान लेना चाहिए कि दुनिया में ये ही धूर्त-मक्कार और खुदगर्ज लोग हैं जो ऎसी बातें करते हुए औरों को भरमाते ... Read More »

प्रकृति विरूद्ध आहार-व्यवहार त्यागें

खान-पान और आबोहवा से ही शरीर सुरक्षित रहता और पुष्ट होता है। अनुकूल भोजन-पानी और हवा की मौजूदगी होने पर शरीर तमाम प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रहता है किन्तु जहाँ कहीं पानी, हवा और अन्नादि में दोष आ जाता है वहाँ इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है क्योंकि शरीर की कोशिकाओं और ऊत्तकों से लेकर अंग-प्रत्यंग, अस्थि, उपास्थि ... Read More »

लायक नहीं ये आतिथ्य सत्कार के

जो जिस योग्य है उसे उसकी योग्यता के अनुरूप ही सब कुछ प्राप्त होना चाहिए। चाहे वह पद, पैसा, प्रतिष्ठा, आदर-सम्मान हो या फिर आवभगत या आतिथ्य सत्कार। न कम  और न ही अधिक। तभी सामाजिक व्यवस्थाओं का संतुलन बना रहता है। अपात्रों को उनकी औकात से अधिक तथा पात्रों को उनकी योग्यता, प्रतिभा और संस्कारों से कम मिलना सामाजिक, ... Read More »

22 दिसम्बर की प्रभात से जानें आगामी छह महीनों का भविष्य

भगवान भास्कर 22 दिसम्बर, शुक्रवार की प्रभात में उत्तरायण में उदित होंगे।  यह प्रभात हम सभी के लिए आगामी छह माहों यानि की उत्तरायण के 6 महीनों के भविष्य का संकेत देने वाली होगी। और इस संकेत को जानने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है स्वर। अपनी नाक से निकलने वाले स्वर से हम जान सकते हैं कि हमारे ... Read More »

मुश्किल है प्रेम करना

दुनिया में इंसान के लिए दो ही रास्ते हैं। एक है प्रेम और दूसरा है दुश्मनी। इन दोनों में हर मामले में विपरीत धाराएं चलती रहती हैं। दुश्मनी कोई किसी से और कभी भी बिना किसी बात के कर सकता है। इसके लिए न कुछ सोचना पड़ता है, न समझना। कोई कारण न हो तो तब भी दुश्मनी की जा ... Read More »

ये भी हैं पाप के भागी

पाप के भागी वे ही नहीं होते जो कि खुद बुरे और बुरे कर्म करने वाले हैं। जो पाप करता है वह प्रत्यक्ष रूप से दोषी होता है किन्तु जो लोग पाप कर्म के लिए प्रेरित करते हैं, उकसाते हैं, पाप कर्म के लिए अवसर, सुविधा और सहयोग प्रदान करते हैं, दुष्टों और पापियों को संरक्षण, आश्रय और  सहयोग देते ... Read More »

खंजर भौंकते हैं वही, जो पीठ थपथपाते हैं

स्व कर्म के फल को इंसान से पाने या प्रशंसा सुनने को उतावले रहने वाले लोगों की जिन्दगी हमेशा तनावों और समस्याओं के दौर से गुजरती रहती है। अक्सर देखा और अनुभव किया जाता है कि खूब सारे लोग किसी भी काम की एवज में कुछ न कुछ चाहते हैं। उन्हें अपने कत्र्तव्य कर्म से कोई सरोकार नहीं होता जो ... Read More »

खुद करो या औरों को करने दो, फटे में टाँग न फंसाओ

कर्म के बारे में आजकल बहुत सारा गड़बड़ सभी जगह देखने को मिलता है। दुनिया में मुख्य रूप से दो तरह की इंसानी प्रजातियां विद्यमान हैं। एक वे लोग हैं जो कर्म करने में विश्वास रखते हैं और दूसरे वे हैं जो कि नाकारा बने हुए कामचोरों की तरह पूरी जिन्दगी निकाल दिया करते हैं। जो काम करने वाले हैं ... Read More »

प्रेम से स्वीकारें आभासी प्रतिकूलताएँ

अनुकूलताओं और प्रतिकूलताओं के आवागमन का नाम ही इंसानी जिन्दगी है और ऎसा कोई इंसान दुनिया में नहीं है जिसके जीवन में इन दोनों में से केवल और केवल एक का ही समावेश हो, अर्थात या तो जिन्दगी भर प्रतिकूलताएं ही हों या फिर अनुकूलताएं ही। मनुष्य के पूर्वजन्म के कर्म के अनुसार ही कर्मफल का भोग भोगना पड़ता है। ... Read More »

ये हैं असली निःशक्त

असली इंसान वही है जो अकेले अपने दम पर बहुत कुछ कर लेता है और उसे किसी की सहायता की जरूरत नहीं होती, न ही वह किसी की दया, कृपा और अनुकंपा पर जिन्दा होता है। असली इंसान बहुमुखी प्रतिभाओं और अपार क्षमताओं के धनी होते हैं और इसलिए कई सारे लोगों का काम अकेले ही कर डालने की क्षमता ... Read More »