Monthly Archives: November 2017

ऊर्जा का रूपान्तरण सीखें

विध्वंस और सृजन की हर भूमिका ऊर्जा से संबधित है। ऊर्जा सूक्ष्म और स्थूल, जड़ और जीवन्त, चल और अचल सभी प्रकार के पदार्थों, तत्वों, अणु-परमाणुओं, तत्वों और पंच तत्वों के सम-विषम मिश्रण से लेकर सृष्टि के प्रत्येक उपादान और प्रभाव तक विद्यमान है। इस ऊर्जा के माध्यम से कुछ भी परिवर्तन लाया और दिखलाया जा सकता है। ऊर्जा के ... Read More »

आत्म विकास परम सुखदायी

यह जरूरी नहीं है कि हमें अपने हर कर्म का फल तत्काल मिल ही जाए। कई प्रकार के कर्म ऎसे होते हैं जिनका फल तत्काल या बहुत कम समयावधि में प्राप्त नहीं हो पाता। और बहुत सारे कर्म ऎसे होते हैं जिनका बीजारोपण आज कर दिया जाए तो उसका फल महीनों, और कई-कई बार बरसों में जाकर प्राप्त हो पाता ... Read More »

कल्पवृक्ष भी बौना है इनके आगे

हम सभी लोग मृग मरीचिका में भटकने के आदी हो गए हैं। हमारी संस्कृति, संस्कार और परंपराओं ने हमें वो सब कुछ दिया है जो हमारे जीवन के लिए अपेक्षित है। लेकिन हमारी मनःस्थिति ऎसी हो गई है कि हम उन सभी के प्रति उपेक्षा और हीनता का बर्ताव करते हैं जो हमारे पास या आस-पास विद्यमान हैं। दूसरी तरफ ... Read More »

आत्म जागरण करें

अपने आपसे अनजान बने रहते हुए सुख और आनन्द की तलाश बाहर-बाहर ही करते रहना हम सभी की वह बुरी आदत बन चुकी है कि जिसने हमारे अपने वर्तमान को बिगाड़ कर रख दिया है और जिसका वर्तमान ठीक नहीं होता उसका भविष्य कभी अच्छा हो ही नहीं सकता। और यह सब किसी और ने नहीं किया है बल्कि हमने ... Read More »

धर्म बिना सब बेकार

बहुत सारे लोग सभी स्थानों पर ऎसे हैं जो अपने कुकर्मों, पाप, दुष्टताओं और राक्षसी वृत्तियों के कारण कुख्यात होते हैं लेकिन किसी न किसी अभेद्य सुरक्षा कवच या संरक्षण की वजह से सार्वजनिक तौर पर कोई इन्हें कुछ कहने-सुनाने की हिम्मत नहीं करता। आवारा साण्डों और बदचलन लोमड़ियों की तरह इंसानों की यह किस्म हर छलांग लगाकर हर बाड़े ... Read More »

सदा रहें मोह मुक्त

मोक्ष मृत्यु के बाद का विषय नहीं है बल्कि जीते जी मुक्ति पाने से है। मोक्ष के लिए इंसान चाहे कितना ही प्रयत्न करता रहे। कितना ही भजन-पूजन और पुण्यार्जन करते हुए यह सोचता रहे कि अन्तकाल में परमात्मा का स्मरण बना रहेगा और मुक्ति आसान हो जाएगी। जन्म-मरण और भवसागर के तमाम बंधनों से छुटकारा प्राप्त हो जाएगा, लेकिन ... Read More »

यों पाएं जीवन-आनंद

मनुष्य का शरीर अपने आप में ईश्वर की वह अनुपम रचना है जिसके माध्यम से वह पृथ्वी लोक पर रहते हुए नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी लोेकों से अपना संबंध कायम कर सकता है। पिण्ड और ब्रह्माण्ड का यह गहरा और अटूट संबंध तभी मूर्त होने लगता है जब इस बारे में पिण्ड का जागरण हो जाए। इसके ... Read More »

साथी वही, जो सच बताए

संग और सत्संग का जीवन में बड़ा ही महत्व है। ये दोनों ही इंसान को जिन्दगी के परम सत्य और लक्ष्य के बारे में निरन्तर स्मरण कराते रहते हैं। इसीलिए इन दोनों ही पर जोर देते हुए कहा गया है कि जिसका संग और सत्संग अच्छा हो, वह सहज स्वाभाविक रूप से अच्छा होगा। इंसान की जिन्दगी का काफी कुछ ... Read More »

यही है असली पुरस्कार और पूंजी

इंसान  की कमाई वो सब कुछ नहीं है जिसका मरने के बाद कोई उपयोग नहीं होता बल्कि असली कमाई वही है जिसे जीते जी भी याद किया जाए और मरने के बाद भी कीर्ति अमर रहे। असल में धन-दौलत, पद-प्रतिष्ठा और प्रभाव किसी न किसी कालावधि में सिमटे होते हैं। इसके बाद इनका कोई अस्तित्व और स्मरण नहीं रहता। अरबों-खरबों ... Read More »