Monthly Archives: November 2017

खुद में जगाएँ आकर्षण

आकर्षण जगाने का एकमात्र उद्देश्य औरों को अपनी ओर खींचने की क्षमता का विकास करना है ताकि लोग हमारी ओर आकर्षित हों तथा हमेशा हमारा आकर्षण बरकरार रहे। इसके लिए दुनिया की अधिकांश आबादी रोजाना तरह-तरह के जतन करती है, दुनिया भर के रसायनों, पदार्थों, द्रव्यों और मिश्रण का प्रयोग करती है। इसके बावजूद अपना आकर्षण स्थायी नहीं रह पाता। ... Read More »

वैराग्य को बनाएं व्यक्तित्व निखार का माध्यम

दुनिया में अधिकतर लोग इस बात से परेशान हैं कि लोग उनकी कद्र नहीं करते, सुनते नहीं, बिना ठोस कारण के हैरान-परेशान करते रहते हैं, तंग कर तनाव देते हैं और रह-रहकर कोई न कोई दुःख देते रहते हैं। और हैरानी की बात यह कि ऎसा सब कुछ अनचाहा उन लोगों के साथ ही होता है जो बेचारे सज्जन, ईमानदार ... Read More »

आवारा ही हैं हम

हम सभी लोग पशुओं को आवारा मानते हैं, लावारिस मानते हैं और इसके लिए किसी न किसी को हमेशा कोसते रहते हैं कि आखिर क्यों इन आवारा और लावारिस जानवरों को लोग क्यों सड़कों, चौराहों और सर्कलों पर छोड़ दिया करते हैं। हममें से खूब सारे लोग अपनी जिन्दगी में कई-कई बार इन आवारा पशुओं की समस्या पर लिख चुके ... Read More »

व्यक्तित्व बनाएँ बहुआयामी

इंसान के रूप में हम वो हर प्रकार के काम करने में सक्षम है जो नियति ने हमारे लिए तय कर रखे हैं। आज का युग ऎसा नहीं है कि हम केवल चन्द कामों और हुनर में ही रमे रहें और अपने आपको सीमित दायरे में नज़रबन्द रखे रहें। आज का युग बहुमुखी व्यक्तित्व की पहचान बनाते हुए छाप छोड़ने ... Read More »

यों करें पापों का प्रायश्चित

कलिकाल में पाप से कोई नहीं बच सकता। पग-पग पर पापियों, पातकियों और पाप का माहौल इतना अधिक पसरा हुआ है कि कोई कितना ही बचने की कोशिश करे, पाप के घेरे में आ ही जाता है। हम खुद कितने ही पवित्र और पुण्यशाली क्यों न हों, पाप से बचना असंभव तो नहीं किन्तु मुश्किल जरूर है। सब तरफ कलियुग ... Read More »

पूर्णता के लिए जरूरी है सम्पूर्ण रिक्तता

यह दुनिया आधे-अधूरों और आंशिकों से भरी हुई है। पूर्ण होने और हर मामले में पूर्णता पाने के लिए हर कोई प्रयत्नशील रहता है लेकिन पूर्णता के करीब नहीं पहुँच पाता क्योंकि पूर्णता पाने के लायक रिक्तता पैदा नहीं हो पाती। हम सभी लोग अतिरिक्त पाने के लिए हमेशा लालायित रहा करते हैं किन्तु अपने पास जो कुछ है, जो ... Read More »

बढ़ते जा रहे हैं अघोषित पागल

हर कोई अपने आप को बुद्धिमान और महान मानने और मनवाने के चक्कर में फँसा हुआ है। और इस फरेब को बरकरार रखने के लिए इतना कुछ मायावी और आडम्बरी होता जा रहा है कि जो कुछ वह था, वह भी नहीं रहा। न घर का रहा, न घाट का, न चौराहों का रहा, न और किसी बाड़ों, गलियारों और ... Read More »

राष्ट्रीय कलंक हैं भिखारी

भिखारियों के कारण देश कई समस्याओं और बीमारियों से जूझ रहा है। हम सभी लोग स्वच्छ भारत अभियान चला रहे हैं लेकिन देश से भिखारियों  की सफाई करने की आज सबसे अधिक जरूरत है क्योंकि इन भिखारियों के कारण से सामाजिक, आर्थिक और परिवेशीय समस्याओं का ताण्डव गहराता जा रहा है। हम लोग धरम और दान-पुण्य के नाम पर जितना ... Read More »

नहीं दिखता टीम वर्क

हम सारे के सारे सामाजिक प्राणी आजकल सामूहिक विकास और टीम वर्क की बातें तो करते हैं लेकिन हमारे भीतर सामूहिक विकास का कितना जज़्बा है, कितना हम टीम वर्क में विश्वास रखते हैं यह समझ पाना कोई मुश्किल नहीं है क्योंकि आजकल लोगों का भरोसा केवल अपने स्वार्थ, स्वयं की प्रशस्ति और वैयक्तिक प्रतिष्ठा तक ही सिमट कर रह ... Read More »

पतित संसर्ग से बचें, वरना मिलेगा नरक

हमारा खुद का अच्छा होना ही काफी नहीं है बल्कि यह भी जरूरी है कि हम जिन लोगों के साथ हों, वे भी हमारी ही तरह अच्छे होने चाहिएं तभी मैत्री और सत्संग का लाभ जीवन में उजाला भरने में कामयाब हो सकता है। किसी भी इंसान के चाल, चलन और चरित्र के बारे में सीधी और सटीक थाह पानी ... Read More »