Monthly Archives: November 2017

सेक्स में असन्तुष्ट है, वही होगा सनकी और विध्वंसक

विषय थोड़ा अटपटा जरूर है किन्तु यथार्थ और सत्य के इर्द-गिर्द ही केन्दि्रत है और सांसारिकों एवं संसार का वह नग्न सत्य है जो हर कोई सुनना, जानना एवं समझना चाहता है किन्तु खुद से नहीं बल्कि औरों से। कोई भी इंसान जन्म से सनकी, उन्मादी और खुराफाती नहीं होता। भगवान ने सभी को समस्त प्रकार की क्षमताओं और सामथ्र्य ... Read More »

अभिशप्त है इनका दाम्पत्य जीवन

सामाजिक प्राणियों के बीच विवाह का परंपरागत और धर्मसम्मत बन्धन अपने आप में जीवन भर के लिए दाम्पत्य माधुर्य का वह दरिया है जो हमेशा पूरे वेग से बहता रहना चाहिए, तभी जिन्दगी का आनंद प्राप्त हो सकता है। जो अविवाहित हैं, जिन्हें अपने मनोनुकूल वर या वधू नहीं मिल पा रहे हैं, उन्हें देखियें, जिन्हाेंंने अपने वैवाहिक जीवन के ... Read More »

यही हैं दुर्भाग्यशाली मनहूस

हम लोग अक्सर अपने भाग्य को कोसते या सराहते हैं। अधिकांश लोग अपनी किस्मत के प्रति अधिक श्रद्धावान नहीं होते। उन्हें लगता है कि भगवान ने उनका भाग्य अच्छी तरह नहीं लिखा, भाग्यरेखाओं के अंकन या लम्बाई बढ़ाने में कहीं न कहीं कोई कमी छोड़ दी है। जब भी अनमना कुछ होता है तब भाग्य को कोसते नज़र आते हैं ... Read More »

खोखले लोग, खोटे करम

इस रहस्य से बहुत कम लोग वाकिफ होंगे कि जिन लोगों को हम बड़ा, महान, पूज्य और सर्वश्रेष्ठ मानते रहते हैं उनमें से कुछ फीसदी ही ढंग के होते हैं जिन्हें वास्तव में श्रेष्ठ स्वीकारा जा सकता है अन्यथा इन बड़े लोगों में अधिकांश खोखले ही हुआ करते हैं। यदि ये अपने खोखलेपन और कमजोरियों को ढकने के ताम-झामों और ... Read More »

दूर भगाएं टाईमपास फालतुओं को

हमारे जीवन भर का पचास से सत्तर फीसदी समय फालतू की चर्चाओं और बेकार के कामों में नष्ट होता है। इस समय का यदि हम सदुपयोग करना सीख जाएं तो दुनिया में नाम कमाने लायक बन सकते हैं लेकिन इसके लिए जीवन में बहुत तरह के संयम की जरूरत होती है जो सामान्य लोग रख नहीं पाते। और इसीलिए भीड़ ... Read More »

अपनों को दें भरपूर प्यार

प्यार शब्द हमेशा से चर्चाओं में रहा है। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लिए यह शब्द गुदगुदाहट और रोमांच जगाने के लिए काफी है।  बात केवल स्त्री और पुरुष के बीच प्यार भरे रिश्तों की नहीं है, बल्कि यह जगत के तमाम जीवों और सृष्टि के प्रत्येक तत्व से प्रेम की है। केवल जीवन्त से ही नहीं बल्कि जड़ ... Read More »

हम असुर हैं या असामाजिक

अपने आपको हम कितना ही समझदार, सामाजिक, प्रतिष्ठित और महान मानते-मनवाते रहें, दुनिया के दूसरे सारे प्राणियों में हम खुद को सर्वश्रेष्ठ और बुद्धिशाली मानते रहें। मानना या मनवाना हमारा पूर्वाग्रह-दूराग्रहजन्य अधिकार है और इस मामले में हम सारे लोग सिद्ध हैं। लेकिन हम इंसानों की दिनचर्या, स्वभाव, व्यवहार और जीवन जीने का जो तरीका है उसे देख कहीं से यह ... Read More »

जिन्दगी भर हाय-हाय

इंसान अपने लाभ और स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकने को न केवल स्वतंत्र बल्कि पूर्ण स्वच्छन्द है। इंसान की तासीर ही यही है कि वह कभी भी कुछ भी कर सकता है। वह अच्छा भी कर सकता है और बुरा भी।  अपने आपको इंसान बनाए रख सकता है, दैवत्व और दिव्यत्व की प्राप्ति के लिए प्रयत्न ... Read More »

जरूरी हैं अवसर, प्यार और प्रोत्साहन

प्रतिभाएं हर इंसान में जन्मजात हुआ करती हैं। इसका पढ़ाई-लिखाई से कोई संबंध नहीं है। कई अनपढ़ लोगों में चमत्कृत कर देने वाली बौद्धिक क्षमताएं होती हैं और खूब सारे पढ़े-लिखे लोग समाज और देश के लिए शोषक, लूटेरे और नाकारा सिद्ध होते हैं। ब्रह्माण्ड के असंख्य विषय हैं, ज्ञान, हुनर और प्रतिभाओं के अनुरूप मौलिक प्रतिभाएं भी असंख्य हैं, ... Read More »

चापलुसी जिन्दाबाद, चमचागिरी अमर रहे

कोई ज्ञान, हुनर और प्रतिभा न हो तो कोई बात नहीं। आजकल लोग चापलुसी और चमचागिरी के सहारे इतने अधिक आगे बढ़ गए हैं, प्रतिष्ठा पा चुके हैं कि पढ़े-लिखों, हुनरमन्दों और बुद्धिजीवियों की बजाय इनकी अधिक पूछ हो रही है। आजकल प्रतिभा, हुनर और कर्म में दक्षता की बजाय अनुचरों, अंधानुचरों और भेड़ों की तरह सिर झुकाकर पीछे-पीछे चलते ... Read More »