Monthly Archives: October 2017

संकल्प ही ब्रह्मास्त्र

चाहे कैसी भी विषम परिस्थितियां क्यों न हों, पूरी की पूरी दुनिया ही हाथ धोकर पीछे क्यों न पड़ जाए, जमाना ही दुश्मन क्यों न हो जाए, इन सभी से मुकाबला कर विजयश्री का वरण किया जा सकता है यदि हमारे संकल्प में बल हो। चौतरफा संकटों, समस्याओं और अभावों का होना इंसान के लिए आत्महीनता, हताशा और पराजय का ... Read More »

घर न ले जाएं आफिस के काम

आफिस या काम-काज स्थल से जुड़े कामों को घर न ले जाएं। आफिस से संबंधित कागजात और सामग्री घर ले जाने से घर का वास्तु भंग होता है और इससे दाम्पत्य या पारिवारिक जीवन में कलह पैदा होता है तथा घर की शांति और सुकून छीन जाता है। जहाँ तक हो सके ऑफिस के काम ऑफिस में ही निपटा लें। ... Read More »

अपनी उपयोगिता सिद्ध करें

उपयोगिता के अनुरूप जीवनयापन और अस्तित्व का होना जरूरी है।  जहाँ हमारा कोई उपयोग न हो पाए, जहाँ प्रतिभाओं, हुनर और काम की कद्र न हो, वहाँ रहने वाले इंसानों का जीवन समय से पहले समाप्त हो जाता है और आयु के साथ-साथ यश और प्रभावों का क्षरण होने लगता है। इंसान कोई सा हो, सामान्य श्रमिक और खेतीहर मजदूर ... Read More »

मायावी कुत्तायुग

कुत्तों को समझने, उनके उपयोग के बारे में जानने और उन्हें आदर-सम्मान एवं श्रद्धा देने का काम हर कोई नहीं कर सकता। ये काम वे ही कर सकते हैं जो कि कुत्तों के प्रजनन और प्रसूति से लेकर इनके जीवनक्रम, व्यवहार, स्वभाव और विशेषताओं से वाकिफ हों। यह काम किसी सामान्य इंसान के बस का नहीं है। इसके लिए कुत्तों ... Read More »

झूठे होते हैं कसम भरोसी

आदमी को आदमी पर भरोसा नहीं रहा। आदमी की बातों पर भरोसा नहीं, कामों पर भरोसा नहीं और सोच-विचार पर भी नहीं। पहले आदमी भीतर-बाहर एक हुआ करता था, कथनी और करनी में कोई फेर-फार नहीं हुआ करता था और आदमी तथा उसकी हर बात भरोसे करने लायक हुआ करती थी। पिछले कुछ दशकों में आदमी की जात इतनी अधिक ... Read More »

बचकर रहें इनसे

कोई कितना ही अच्छा, शुद्ध, पवित्र और सदाचारी क्यों न हो, यदि उसके आस-पास या साथ वाले लोग अच्छे न हों, जिस स्थान पर हम अधिकांश समय गुजारते हैं, उस स्थान का माहौल ठीक न हो, नकारात्मकताओं से भरा परिवेश हो, तो हमारी तरक्की तो बाधित होगी ही, हमारा सौभाग्य भी दुर्भाग्य में बदल जाएगा और दृश्य तथा अदृश्य दुष्ट ... Read More »

बौद्धिक आतंकवाद

साधना और श्रद्धा एकान्तिक विषय हैं और भगवदीय मार्ग के प्रचार-प्रसार के लिए इनसे जुड़े विषयों पर चिन्तन-मनन और जिज्ञासुओं तक जानकारी का संवहन होना चाहिए। इसी प्रकार भगवान की मूर्तियों और तस्वीरों के दर्शन तथा कर्मकाण्ड का भी श्रद्धा से गहरा रिश्ता रहा है लेकिन आजकल धर्म के मूल मर्म से जुड़ी बातें गायब हैं और इनके स्थान पर ... Read More »

आत्मीयता का प्रपात, लोकसेवा के पर्याय भाई श्री सुरेश पाठक

हर दिल अजीज, असंभव को संभव कर देने वाला टाईगर नहीं रहा विश्वास आज भी नहीं होता, पर नियति के शाश्वत सत्य को स्वीकार करने के सिवा और कोई चारा भी नहीं।  अभी 9 अक्टूबर 2017 सोमवार की ही बात है। मनहूस संध्या काल के कपाल पर कुछ ऎसा लिख गई है कि जिसे कोई पढ़ न सका। केवल सूचना ... Read More »

झूठों की भरमार

किसी भी इंसान की टोह लेनी हो तो सबसे पहली कसौटी यही है कि वह झूठा है या सच्चा। जो इंसान सच बोलता है वही सच्चा है। जो झूठ बोलता है उसे सच्चे इंसान की परिधि में नहीं रखा जा सकता। जो इंसान झूठ बोलता है, चाहे वह झूठ आंशिक हो, आधा-अधूरा हो या फिर पूरा का पूरा, उस इंसान ... Read More »

विरोधी अमर रहें, चुनौतियाँ बनी रहें

सृष्टि में जागरण हो तभी नवप्रभात का अहसास होता है अन्यथा बहुत सारे लोग हैं जिनके भाग्य में उषाकालीन सूर्य के दर्शन नसीब नहीं हैं। हर इंसान के जीवन में रोजाना नवप्रभात का सुनहरा सूरज उगता है, कुछ लोग इस शाश्वत सत्य को स्वीकार कर उसका लाभ लेते हैं और दूसरे सारे बिना अंधकार के उदासीनता की चादर ओढ़कर भोर ... Read More »