Monthly Archives: October 2017

वास्तु चर्चा – प्रगति में बाधक हैं ये

हर प्रकार का प्रवाह अपने आप में सहज, सरल और निर्बाध रहना चाहता है। जब तक उसकी यह मौलिक अवस्था बनी रहती है तभी तक यह प्रवाह देखने में आनंददायी और अनुभव करने में सुकूनदायी रह सकता है। जैसे ही उसकी मौलिकता मेंं आंशिक या पूर्ण अवरोध आरंभ होता है वैसे ही यह प्रवाह अपना अस्तित्व खोने लगता है या ... Read More »

देसी नुस्खे आजमाएँ – रोग दूर भगाएँ

हमारे यहां छोटी-मोटी बीमारियों के ईलाज के लिए परम्परागत जड़ी-बूटियों और घरेलू मसालों का इस्तेमाल रामबाण सिद्ध होता रहा है। पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय जंगलों में उपलब्ध वनस्पतियों के आधार पर ही चिकित्सा की पुरातन परम्परा विद्यमान रही है। आज भी कई परिवारों में आयुर्वेद या पुराने नुस्खों के आधार पर ही सेहत का ख्याल रखा जाता है। ... Read More »

स्वास्थ्य चर्चा – स्वाईन फ्लू में रामबाण है होम्योपैथिक निदान

स्वाईल फ्लू के संभावित संक्रमण से बचाव के लिए ऎहतियाती उपायों को अमल में लाने के साथ ही होम्योपैथी चि कित्सा पद्धति बेहतर कारगर है।  जाने-माने होम्यापैथी चिकित्सा विशेषज्ञ एवं संजीवनी क्लीनिक के संचालक डॉ. रुचिर नागर बताते हैं कि आजकल देश के विभिन्न हिस्सों में स्वाईन फ्लू तेजी से अपने पांव रहा है और इससे संक्रमित रोगियों की संख्या तेजी ... Read More »

चिकित्सा का चमत्कार – जलचर जोंक करती है इंसानों का ईलाज

   पानी में पायी जाने वाली जोंक मामूली जलचर ही नहीं बल्कि इंसानों के लिए आरोग्य देने वाली है। इसका प्रयोग त्वचा एवं रक्त संबंधित कई बीमारियों में किया जाता है।        पुराने जमाने में लोग इन जलचर जीवों के माध्यम से अपनी कई सारी बीमारियों का ईलाज किया करते थे। फोड़ा-फुँसी या रक्त विकार हो जाने अथवा चमड़ी से ... Read More »

दीप से दीप जलाते चलो ….

दीपावली रोशनी का पर्व है और यह संदेश देता है कि न केवल हमारा जीवन बल्कि सभी का जीवन आलोकित बना रहे, परिवेश में उजाला बना रहे और कहीं भी अँधेरे का नामोनिशान न रहे। दो-चार दिन दीप जलाकर रोशनी कर देने का कोई औचित्य नहीं है यदि हमारे अन्तर्मन में दीवाली के दीपों का संदेश साल भर न बना ... Read More »

वागड़ अंचल को गर्व है नवाचारी सृजनधर्मी शिक्षिका ऊषा पण्ड्या पर …

सुनहरा भाग्य लिखती है हर लकीर … लकीरों का कमाल अपने आप में इतना अधिक करामाती और तिलस्मी होता है कि यह अक्षर ब्रह्म की आराधना का आरंभिक चरण है। बांसवाड़ा जिले की होनहार शिक्षिका श्रीमती ऊषा पण्ड्या ने अपने मौलिक हुनर के बूते जिस तरह लकीरों से अक्षरों और वर्णों की दुनिया को नवीन आयाम दिए हैं, यह अपने ... Read More »

मनः सौन्दर्य ही देता है आकर्षक रूप-रंग

पूरी दुनिया रूप की दीवानी है। भारतीय संस्कृति में तो दीवाली और धनतेरस के बीच का पूरा दिन ही रूप की आराधना को समर्पित होकर रूप चौदस या रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। धर्मशास्त्रीय महत्व के साथ ही यह पर्व रूप-रंग निखारने के लिए प्रसिद्ध है। आजकल इंसान के लिए गुणों, हुनर, ज्ञान और अनुभवों से लेकर ... Read More »

असली धन तो ये है

धन के मामले में हमारी सोच आज भी विकसित नहीं हो पायी है। धन और लक्ष्मी के मामले में हमने यही मान लिया है कि मुद्रा, आभूषण और जमीन-जायदाद ही धन हैं और जीवन के लिए ये ही सब सर्वोपरि हैं। इस धन को समझने के लिए एकमात्र शब्द निधन पर गंभीरता से सोचना चाहिए। धन वह है जो निधन होने से पूर्व हमें प्राप्त था। इसमें न केवल धन-दौलत, जमीन-भवन, स्वर्ण-रजत आभूषण या और कुछ ही धन नहीं है बल्कि धन है हमारा जीवन, प्राणों का ... Read More »

जो आजमाएं सो निहाल- सेहत और समृद्धि पाने का अनूठा दीवाली टोटका ….

दीपावली पर उपहारों, मिठाइयों और भेंट-पूजा से पाएं नई जिन्दगी दीपावली पर दो तरह के लोगों की भरमार रहती है। एक तरफ वो बहुसंख्य लोग हैं जिनके लिए यह विवशता होती है कि अपने बॉस-बॉसियों, आकाओं, कल्याणकारी समाज की नवरचना के लिए ही पैदा हुए मध्यस्थों और लोकपूज्य माने जाने वाले महान और बड़े लोगों को खुश करने के लिए ... Read More »

हिलने लगी है बुनियाद

सब तरफ अनिश्चितता का दौर व्याप्त हो गया है। आदमी का कोई भरोसा नहीं रहा। कभी इधर कूद पड़ता है कभी उधर। हर तरफ उछलकूद का जमाना है। किसी को सूझ नहीं पड़ रही है कि आखिर क्या करे और क्या न करे। जब से आदमी अपनी जड़ों से कट गया है, गाँव और संस्कृति से दूर हो गया है, ... Read More »