Monthly Archives: September 2017

नंगे-भूखे आतुरों का आसुरी नाच-गान

हमने नवरात्रि कर ली, रावण दहन कर दशहरा मना लिया। फिर भी कुछ दिख नहीं रहा है इसका कोई प्रभाव। सब तरह भरमार है कुटिल चेहरों की, जिनका दिल कुछ और धड़कता है, दिमाग कभी किसी घातक खुराफाती षड़यंत्र का शिलान्यास करता है और कभी अपने किये षड़यंत्रों के महलों के उद्घाटन कर खुद को नियन्ता व भाग्यविधाता के रूप ... Read More »

बंद करो रावण दहन

यह तो पता नहीं कि रावण दहन कब से आरंभ हुआ और किसने शुरू किया। लेकिन इतना तो सभी जानते हैं कि इसका उद्देश्य प्रतीकात्मक रूप से असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय और असुरों पर देवों की जीत के प्रतीक स्वरूप में यादगार माना जाकर किया जाता है। दशहरे पर यह परंपरा इतने गहरे तक ... Read More »

दैवीय गुण आएं तभी शक्ति उपासना सफल

शक्ति तत्व का अर्थ अत्यन्त व्यापक और गहन अर्थों को समेटे हुए हैं। शक्ति उपासना से भी तात्पर्य केवल नवरात्रि का भजन-पूजन, कीर्तन-गरबा, देवी महिमा के भजनों, मंत्रों और स्तुतियों से भरी कैसेट्स, फिल्मी और दूसरे गाने, माईक और डीजे चलाने से ही नहीं है बल्कि शक्ति की उपासना तभी सार्थक है जबकि हमारे भीतर शक्ति तत्व का जागरण, संचरण ... Read More »

नवरात्रि पर विशेष – भक्तिभाव से करें मैया की आराधना

साल भर में कुछेक अवसर ही ऎसे आते हैं कि जब उस समय विशेष में जो कुछ किया जाता है उसका अनन्त गुना फल प्राप्त होता है और इस काल में प्राप्त ऊर्जा जीवन भर के लिए उपयोगी बनी रहती है। इसका कभी क्षरण नहीं होता। नवरात्रि ऎसा ही एक पर्व है जिसमें की जाने वाली शक्ति उपासना अपने आप ... Read More »

तैयार रहें भूत-प्रेत बनने के लिए

संसार में आने के बाद जो कुछ पाया है उसे यहीं छोड़ कर जाना है। मोह-माया, साधन-संसाधन, घर-बार, धन-दौलत और सब कुछ नहीं छोड़ेंगे, तब भी छूट जाने वाले हैं। आज तक कोई भी साथ लेकर नहीं जा सका है इसलिए इस बात को दिमाग से निकाल ही दें कि हम जाएंगे तो साथ ले जाएंगे। साथ कुछ नहीं जाने ... Read More »

देवी नहीं स्वीकारती इनकी पूजा

हम सभी लोग इन दिनों नवरात्रि काल की शक्तिपूजा में व्यस्त हैं और इसी प्रयास में हैं कि देवी मैया हम पर प्रसन्न हों, हमारी बाधाएं दूर हों तथा मनचाहे काम अपने आप होते चले जाएं, सभी प्रकार से सुख-समृद्धि और आरोग्य प्राप्त हो और मैया की कृपा मिलती रहे। शक्तिपूजा, नवरात्रि और देवी उपासना की बात सभी लोग करते ... Read More »

जरूरी है हर फिक्र का जिक्र

मानवीय संवेदनाओं से भरा वह दौर चला गया जब लोग औरों के दुःख और समस्याओं को देख कर इनके निराकरण के लिए अपनी ओर से पहल करते हुए मदद करते और दुःखों, संत्रासों और तनावों से मुक्त करने-कराने में समर्पित भागीदारी अदा करते हुए मानवी जीवन का आनंद प्रदान किया करते थे। अब लोगों को अपनी ही पड़ी है, अपने ... Read More »

बचाए रखें, अपनी शक्ति

शक्ति संचय का उद्देश्य जगत का कल्याण करना है। और इस जगत में अपने बंधु-बांधवों के साथ सभी जीव शामिल हैं जिनके लिए इन्सान जीता है। इंसान का फर्ज यही है कि वह जिनके बीच रहता है उनके बहुविध कल्याण में सहभागी हो, उनके दुःख-ददोर्ं के निराकरण में हिस्सेदार बने और उनके जीवन निर्वाह में आ रही बाधाओं को दूर ... Read More »

जागृत करें शक्ति

शक्ति की तलाश बाहर नहीं भीतर करें। बाहर सब कुछ दिखावा ही दिखावा है शक्ति का कोइ्र कतरा नहीं। शक्ति हम सभी के भीतर है, सुप्त है जाने कितने जन्म-जन्मान्तरों से। शक्ति की तलाश बाहर करोगे तो कभी प्राप्त न कर पाओगे, जिन्दगी यों ही निकल जाएगी और सुप्त शक्ति के साथ ही होना पड़ेगा भस्मीभूत। तब शक्ति अपना अस्तित्व ... Read More »

साधना में अवरोध सिद्धि समीप्य का संकेत

ईश्वर से साक्षात्कार, सिद्धावस्था पाने या कि सिद्धि पाने के लिए किए जा  रहे प्रयत्नों में लगे हुए लोगों का यह अनुभव रहता है कि जैसे-जैसे वे साधना में उत्तरोत्तर उच्चावस्था की ओर बढ़ने लगते हैं वैसे-वैसे साधना के मार्ग में ढेर सारी बाधाएं आनी शुरू हो जाती हैं और बाधाएं भी ऎसी कि ये पूर्णतया आकस्मिक, अप्रत्याशित और अकल्पनीय ... Read More »