Monthly Archives: August 2017

पापमुक्ति में सहायक हैं दुष्ट और नीच सहकर्मी

भौतिकता और दिखावों से भरे मौजूदा युग में आदमी बाहरी संसाधनों, पद-प्रतिष्ठा और वैभव से परिपूर्ण होने लगा है लेकिन इसी अनुपात में भीतर से खोखला होता जा रहा है। अब न किसी पर आसानी से भरोसा किया जा सकता है और न ही किसी भी काम को दूसरों को सौंपकर निश्चिन्त हुआ जा सकता है। इसी तरह हम सभी ... Read More »

अपना योगदान दें, भागीदारी निभाएँ

आत्मकेन्दि्रत जिन्दगी और स्वार्थों की पूर्ति के लिए हर तरफ मारामारी मची हुई है और इसने सामाजिक प्रबन्धन को पूरी तरह गड़बड़ा दिया है। जो इंसान सामाजिक प्राणी के रूप में जाना जाता रहा है वह अब अपने-पराये के भेद में उलझता जा रहा है। वह अपने समूहों या कुनबों पर ही ध्यान देने के चक्कर में समुदाय और क्षेत्र ... Read More »

न करें कल की प्रतीक्षा

समय न किसी का सगा होता है, न शत्रु। हम ही हैं जो समय को पहचान नहीं पाते और इसकी बेकद्री करते रहते हैं।  जो समय की कद्र नहीं करता, समय भी उसकी परवाह नहीं करता। यह  समय ही है जो अच्छे-अच्छे आलसियों और प्रमादियों को समय से पहले ही ठिकाने लगा देता है और हालत इतनी अधिक खराब हो ... Read More »

ये पति नहीं, पतित हैं

यों तो आजकल तकरीबन तमाम संबंधों में मिलावट और घालमेल हो गया है। और यह मिक्चरी कल्चर भी ऎसा कि पता ही नहीं चल पाता कि कौन क्या है। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाए तो हम सारे ही लोग सामाजिक प्राणी हैं लेकिन हमारे ही भीतर कई सारे लोग ऎसे हैं जो असामाजिकता के पूरक और पर्याय हो चले ... Read More »

कुपुत्रों का मोह त्यागें

मोक्ष या गति-मुक्ति पाने के लिए यह जरूरी है कि जब ऊपर जाएँ तब हमारा मन किसी में अटका न हो, न संतति और न ही सम्पत्ति, संसाधनों या जमीन-जायदाद में। अक्सर हम कृपणता का आलिंगन करते हुए जिन्दगी भर भिखारियों और दरिद्रियों की तरह बने रहते हैं और जो समय मिलता है उसमें जमा ही जमा करते चले जाते ... Read More »

यह पोस्ट केवल ब्राह्मणों के लिए है – इसलिए हो रहे ब्राह्मण दरिद्री और भिखारी

ब्राह्मणों को लोग भोजन कराते हैं इसके पीछे कई सारे कारण हैं। इनमें एक कारण यह भी है कि ब्राह्मण भोजन से पुण्य की प्राप्ति होती है। जो ब्राह्मण नित्यप्रति संध्या और गायत्री करते हैं वे तो यजमानों का भोजन अपनी तपस्या के बल पर पचा लिया करते हैं लेकिन जो लोग संध्या-गायत्री नहीं जानते या नहीं करते, वे इसे ... Read More »

धर्मक्षेत्रे – वागड़ में श्रावण मास की खण्डित पूर्णाहुति

वागड़ अंचल में अमान्त पद्धति के अनुसार श्रावण मास 21 अगस्त, सोमवार को समाप्त होगा। जो लोग श्रावण मास के व्रत करते हैं उनके लिए व्रत का उद्यापन कुछ स्थानों पर अमावास्या को ही हो जाता है। पूरे माह व्रत रखकर व्रत के अंतिम दिन अमावास्या को ही पूर्णाहुति कर दिए जाने के बाद भोजन-प्रसाद ग्रहण कर लिया जाता है। ... Read More »

अमृत कलश

पितरों के संदर्भ को छोड़कर दक्षिण दिशा की ओर मुँह कर भोजन न करें। अपने जूते-वाहनों आदि का मुँह (अगला सिरा) दक्षिण दिशा की ओर न रखें। इससे बीमारी और अनिष्ट की आशंका बनी रहती है। Read More »

ऊपर जाने का रास्ता

उन सभी लोगों को यह रास्ता दिखाएं जो किसी काम के नहीं हैं। बहुत से बड़े-बड़े भवनों में यह वाक्य यों ही नहीं लिखा जाता। जितना बड़ा आदमी, उतने रास्ते जरूरी हैं ऊपर जाने के। हमारे आस-पास भी खूब सारे लोग हैं, जिन्हें यह रास्ता दिखाना बहुत जरूरी हो चला है। Read More »

नशाखोर नहीं होते भरोसे लायक

यों तो आजकल आदमी पर भरोसा खत्म होता जा रहा है। किसी पागल, आधे पागल या जानवर पर एक हद तक भरोसा किया भी जा सकता है लेकिन आदमी अब भरोसेलायक रहा ही नहीं। कुल जमा विस्फोटक भीड़ में बहुत से आज भी ऎसे हैं जिन पर आँख मूँद कर भरोसा किया जा सकता है लेकिन इनकी संख्या नगण्य है। ... Read More »