Monthly Archives: July 2017

ऊँचाइयाँ देता है संक्रान्ति काल

परिवर्तन कालचक्र का अपना स्वधर्म है जिसकी सहायता से व्यष्टि और समष्टि में नित-नूतन बदलाव की भूमिकाएं रचती रहती हैं। यह परिवर्तन ठीक उसी तरह है जिस तरह परमाण्वीय विखण्डन से ऊर्जाओं का नवीन-नवीन प्राकट्य व विस्फुरण होता रहता है और द्रष्टा जगत को परिवर्तन का अहसास कराता रहता है। परिवर्तन के क्रमिक दौर केवल वहीं पर पाषाण और चट्टानों ... Read More »