Monthly Archives: July 2017

तुलना करें सज्जनों से

अपार जमीन-जायदाद, उन्मुक्त भोग-विलास, अखूट धन-वैभव और समृद्धि कोई भी प्राप्त कर सकता है, अपने आपको दूसरों के मुकाबले महान, लोकप्रिय और सफल मानना-मनवाना भी संभव है किन्तु सरल, सहज, निष्कपट, उदारमना और जगत के प्रति संवेदनशील होना सभी के बस की बात नहीं है। वैभवशाली होने और महानता के दिखावे करने से कहीं अधिक जरूरी है सज्जन होना और ... Read More »

धन्धा चालु आहे… कौन गुरु – कौन चेला

गुरुओं और चेले-चपाटियों के नाम पर दुनिया में बहुत बड़ी रिलीजिसय इण्डस्ट्री चल रही है। बेचारे असली गुरु हाशिये पर हैं या एकान्त पाने के लिए कन्दराओं का रूख कर गए हैं और जो बचे हुए दिख रहे हैं वे गुरु घण्टालों से कम नहीं हैं। गुरुओं को भीड़ बढ़ाने के लिए चेलों की तलाश है और चेले-चेलियों को अपने ... Read More »

ट्रस्टी बने रहें वरना भूत बन जाएंगे

पूरी की पूरी संसार यात्रा आधिपत्य जमाने के लिए नहीं बल्कि पूर्व जन्मार्जित लेन-देन भरे ऋणों के चुकारे के साथ ही ट्रस्टी के रूप में जीवननिर्वाह के लिए है। जो है, जो हो रहा है और जो होना है वह सब कुछ भगवान का है और उसी के द्वारा चलायमान है। सम्पूर्ण जगत का स्वामी परमपिता परमेश्वर है लेकिन जब ... Read More »

मसखरों की जमात

मुर्दों और जिन्दाओं में और कोई समानता हो न हो, एक समानता तो यह है ही कि दोनों को संगी-साथियों की मौजूदगी और तलाश हमेशा बनी रहती है। मुर्दों को अपने धाम तक पहुंचने के लिए चार-छह जने चाहिएं तो जिन्दाओं को अपने साथ चालीस-पचास लोगों की भीड़ हमेशा चाहिए होती है।  जब से संख्याबल का जमाना आ गयाहै तब ... Read More »

मेवाड़ अंचल के वयोवृद्ध पत्रकार पं. जीवराज शर्मा का सम्मान

पुरानी पीढ़ी के जुझारू, दशकों से पत्रकारिता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्यरत संघर्षशील योद्धा तथा वयोवृद्ध पत्रकार पं. श्री जीवराज शर्मा का राजसमन्द में आध्यात्मिक चिन्तक एवं प्राचीन तंत्र विद्याओं  के सिद्धहस्त, उदासीन धूंणा, लालबाग नाथद्वारा के महंत श्री बाबा रामदास महाराज एवं दूरस्थ सघन वन क्षेत्रों के बीच गोरमघाट स्थित पर्वतसिंह की धूंणी, काजलवास के बाबा बाल ... Read More »

इन्हें करो संग्रहालय के हवाले

कब तक सजाये रखकर शोकेस में इन लोगों को महान मानते मनवाते रहोगे। अर्सा हो गया है अब तो बाहर का रास्ता दिखाओ इन्हें। इंसानों के लिए ही जमीन कम पड़ रही है और हम हैं कि इन र्मूतियों और पुतलों को मंच, लंच और सब कुछ हाजिर करते हुए अपने को धन्य और गौरवशाली मानकर फूले नही समा रहे। ... Read More »

भाग्योदय का संकेत है दुःख प्राप्ति

प्राणी मात्र के जीवन में सुख और दुःख के आवागमन का शाश्वत और अवश्यम्भावी क्रम निरन्तर बना रहता है। न्यूनाधिक रूप में प्राप्त होते रहने वाले सुख और दुःख देह के लिए बने होते हैं, आत्मा के स्तर पर इनका कोई प्रभाव नहीं रहता। आत्मा इन सभी से असंपृक्त है।  देह के स्तर पर किए जाने वाले अच्छे कर्म पुण्य ... Read More »

कितनी पाक-साफ है हमारी निजी जिन्दगी

हम सारे लोग आजकल दोहरी-तिहरी और बहुरी जिन्दगी जीने के आदी होते जा रहे हैं। बहुत कम लोग होंगे जो कि अपनी जिन्दगी को पाक-साफ और शुचितापूर्ण तरीके से जीते होंगे अन्यथा बहुसंख्य लोग दोहरे-तिहरे चरित्र वाली, छल-कपट और धूर्तता-मक्कारी से परिपूर्ण जिन्दगी जीने को ही जीवन समझ बैठे हैं। इन लोगों को यही लगता है कि वे जिस तरह ... Read More »

किसे घास डालें ?

अपेक्षाओं का महासागर हर तरफ पूरे यौवन पर है। हर कोई महत्वाकांक्षी बना हुआ डोल रहा है या फिर उच्चाकांक्षी।  ज्ञान, अनुभव और हुनर वाले भी इच्छाओं की पूर्ति के लिए भटक रहे हैं और मूर्ख, अज्ञानी, नासमझ और नाकारा भी। सबको वही सब चाहिए जो औरों को मिल रहा है। मेहनत करके पाने वालों की अपेक्षा अधिकांश वे हैं ... Read More »

खात्मा करें भिखारियों का

जो दीन-हीन और हर तरह से विपन्न है उसे भीख मांग कर गुजारा करने का पूरा और पक्का अधिकार है। उसके लिए भीख ही है जो जीवन की सारी आवश्यकताओं को पूरा करती है और भीख न मिले तो इन लोगों का जीवन संकट में पड़ जाए। भिखारी वही है जो आज की चिन्ता करता है और केवल आज भर ... Read More »