Monthly Archives: May 2017

संतति को दें सान्निध्य-सामीप्य

जीवात्माओं के मध्य कौटुम्बिक माधुर्य, साहचर्य और सामीप्य का जो शाश्वत आनन्द है उतना न जीवन के किसी और कर्म से प्राप्त हो सकता है और न ही कोई ऎसा इंसान दे सकता है जिससे खून का रिश्ता न होकर स्वार्थ और सांसारिक संबंध हो। जो अनिर्वचनीय और शाश्वत सुख पारिवारिक परिधियों में सिमटा हुआ होता है वह किसी और ... Read More »

रोचक घटना – जब सारे अतिथि और वक्ता ठगे से रह गए

वागड़ के रत्न ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्री पन्नालाल पटेल की जयन्ती पर विशेष प्रस्तुत   डूंगरपुर जिले के सरहदी गांव माण्डली में जन्मे और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता श्रद्धेय श्री पन्नालाल पटेल जी का आज जन्म दिन है। इस अवसर पर एक ऎसी रोचक घटना सुनाने को जी कर रहा है जिसे पढ़ कर कोई भी हँस-हँस कर लोट-पोट हुए बिना ... Read More »

नालायकों का सबसे बड़ा हथियार है असहयोग

जिन लोगों को एक ही तरह के बाड़े में वर्षों गुजारते रहने की आदत पड़ जाती है वे लोग यह कभी बर्दाश्त नहीं करते कि नई हवाओं की ताजगी आए, कोई अच्छा काम करने वाला उनके वहाँ आ जाए। ऎसे लोगों का सबसे बड़ा हथियार असहयोग है। आजकल बहुत जगहों पर पुराने पापियों और मठाधीशों के डेरे हैं जो बरसों ... Read More »

अपनी बात – मेरा लेखन स्वाभाविक अभिव्यक्ति मात्र

मेरा कोई भी लेखन मेरा नहीं है। जो अनायास विचार आते हैं वह भगवान के वहां से आते हैं और धड़ाधड़ लिपिबद्ध हो जाते हैं। और इन्हें ही आगे से आगे परोसगारी का दायित्व निभा रहा हूं। वैसे मेरा लेखन किसी भी मोड़ पर असत्य या धर्महीन लगे, तो जरूर बताएं।  सत्य कड़वा होता है और रहेगा। इसका यह अर्थ ... Read More »

प्रसाद

देवी-देवताओं को समर्पित हर वस्तु प्रसाद इसे बेचने व खरीदने वालों को लगता है पाप भगवान को समर्पित की गई हर वस्तु अपने आप प्रसाद में परिवर्तित हो जाती है। जो सामग्री भगवान की मूर्तियों के समक्ष या मंदिरों में चढ़ाई जाती है उसका प्रसाद रूप में निःशुल्क वितरण उन वालों को कर दिया जाना चाहिए जो जरूरतमंद हैं। आजकल ... Read More »

आत्मविश्वास खो देते हैं अपराधबोध से ग्रस्त लोग

हम लोग बड़ों और प्रभावशालियों से भय खाते हैं और इसी का फायदा उठाकर ये लोग स्वच्छन्द, उन्मुक्त और निरंकुश हो जाते हैं। इनके प्रभावी होने की वजह से हम लोग इनका न विरोध कर पाते हैं न प्रतिरोध। और यही कारण है कि हमारी उदासीनता और मूकदर्शक भावों के कारण असामाजिक, भ्रष्ट और बेईमानों, लूट-खसोट करने वालों का ताण्डव ... Read More »

मुर्दानगी छोड़ो, मुस्कुराते रहो, मस्त रहो

जो प्यार एक मुस्कान द्वारा व्यक्त हो सकता है, वह हजारों नमस्कारों द्वारा व्यक्त नहीं हो सकता। मुस्कराने में अपना कुछ खर्च नहीं होता पर जिसे मुस्कान मिलती है उसकी खुशी बढ़ जाती है। मुस्कराने में शायद एक क्षण लगता है पर उसकी याद किसी को जीवन भर रह सकती है। अपने दैनिक कार्यों में जहाँ भी जिससे मिलिए, मुस्कराते ... Read More »

ये लोग न करें दान

जो लोग कर्ज में दबे हुए हैं, जिनके जीवन की रोजमर्रा की आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं  उन लोगों को दान-पुण्य नहीं करना चाहिए। ऎसे लोग दिखावों या किसी के बहकावे में आकर दान-पुण्य करते हैं, दक्षिणा देकर पूजा-पाठ कराते हैं, उसका कोई फल प्राप्त नहीं होता। इनके लिए यही श्रेयस्कर है कि पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की ... Read More »

देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं ये सुपर भिखारी बिकाऊ लोग

बिकने वाले लोग न समाज के हो सकते हैं न देश के। इन पर कभी भी किंचित मात्रा में भी विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। ये लोग संसार में अपने आपको बिकवाने के लिए ही पैदा हुए हैं और इन्हें पैसों, भोग या लालच देकर कभी भी खरीदा जा सकता है। फिर जो एक बार बिकना शुरू हो जाता है ... Read More »

यही है असली छत्र-छाया

जिन लोगों के माता-पिता जीवित होते हैं वे लोग ग्रह-नक्षत्रों, भूत-प्रेतों तथा बाहरी नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से सुरक्षित रहते हैं। माता-पिता का साया हमारे लिए अपने आप में अभेद्य सुरक्षा कवच है जिसे कोई नहीं भेद सकता। यहां तक कि शनि की ढैया और साढ़े साती में भी सुरक्षित रहते हैं।  पर शर्त यही है कि माता-पिता हमसे प्रसन्न ... Read More »