Monthly Archives: April 2017

मन, कर्म और वचन से पक्का, वही ज्योतिषी सच्चा

ज्योतिष यों तो हमेशा लोकप्रिय रहा है लेकिन इन दिनों इसके प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव देखा जा रहा है। जब से टीवी पर ज्योतिष और चमत्कारों की चर्चाएं बढ़ी हैं तब से तो ज्योतिष का ग्लैमर ही कुछ विचित्र होता जा रहा है। लेकिन जिस अनुपात में ज्योतिष का वर्चस्व बढ़ा है उस अनुपात में ज्योतिषीय सच्चापन नहीं बढ़ ... Read More »

इधर – उधर की

कोई फर्क नहीं है – तटस्थता और नपुंसकता में। नपुसंकता नैसर्गिक या संयमहीनता से, तटस्थता ओढ़ी हुई बेहोशी। धर्म परम्परा – खुले साण्ड किसी को भी छेड़ सकते हैं, साण्डों को कोई नहीं। कश्मीर में सेना की हर कार्यवाही में सेकुलरों, शान्तिदूतों और पत्थरबाजों के हिमायतियों को आगे रखें। मेहनत करने में शर्म न आए तो घर-आँगन और खेत-खलिहान से ... Read More »

वैराग्य नहीं विरक्ति का आनंद पाएं

वैराग्य दुःख, शोक और अभावों से प्राप्त होता है और इसके साथ कई सारे मनुष्यों की स्मृतियां जुड़ी होती हैं जिनके बाद में कई-कई बार उभरने, अंकुरित होने और पल्लवित-प्रसरित होने की तमाम संभावनाएं बनी रहती हैं। यह प्रतिकूल घटनाओं-दुर्घटनाओं से भरे हुए अवचेतन से प्राप्त होता है इसलिए जब भी दुःखों या अभावों के अवसर आएंगे, अवचेतन के द्वार ... Read More »

दुनिया का यथार्थ

  बहुत सो का तकिया कलाम है – ठाकुरजी की कृपा है। और इनके आचरण दैत्यों से भी गए बीते हैं।   धर्म रहस्य – असली प्रसाद वही जो बिके नहीं, जो बिकता है वह केवल पदार्थ है।   श्रीकृष्ण अहर्निश महान-कर्मयोगी थे। उनके भक्त कभी कामचोर नहीं हो सकते।   सेवा-पूजा का ढोंग देखने लायक है लेकिन कामचोरी के ... Read More »

मेरी विनम्र राय

अपनी अपरिमित ऊर्जा और क्षमता हमारे सकारात्मक कल्याण के लिए है। निन्दा, विरोध और बाधाएं वहीं आती हैं जहां कार्यसिद्धि की संभावनाएं होती हैं। सबसे बढ़िया और बड़ा उपाय है उपेक्षा। अपने कर्म में कमी न लाएं, निरन्तर कर्म करते रहें। ये स्थिति दुनिया के हर महापुरुष और हर अभियान के साथ रही हैं। अपनी दैवीय ऊर्जा और दिव्यताओं का ... Read More »

उपेक्षा करें कमीनों की

असुरों की सबसे बड़ी विजय है दैव वंश का प्रभावित और प्रतिक्रियावादी हो जाना। लोग हमें भटकाने – भड़काने की कोशिश करते रहते हैं और यही चाहते हैं कि हम अपने श्रेष्ठ कर्म को छोड़कर भटक जाएं। जो कुछ कर रहा है उसे करने दो। उस तरफ ध्यान देने का अर्थ है कि हम उसे गंभीरता से ले रहे हैं। ... Read More »

नंगों-भूखों से क्या लड़ना-भिड़ना …

सुन्दर परिधान वाले और नंगे आदमी में जब संघर्ष होता है, छीना झपटी होती है तब नंगा ही फायदे में रहता है नुकसान तो सज्जन का होगा, जिसके कपड़े फटने से खुद भी नंगा दिखने को विवश होगा। नंगे इंसान के पास खोने को क्या है? Read More »

चोरों से बचने का मंत्र

जब भी कहीं बाहर जाना हो, चोरों का भय हो, तो दरवाजा बन्द कर निम्न मंत्र को तीन बार बोल कर द्वार या ताले को खटखटा दें। इससे चोरों का भय नहीं रहेगा। रात को सोने से पूर्व अपने सभी दरवाजों को यह मंत्र बोल कर बन्द करें। इससे चोर घर में प्रवेश करने का साहस नहीं कर पाएंगे। ऊँ ... Read More »

दोषी हम ही हैं जमाना नहीं

हम खुद कुछ करना या कहना नहीं चाहते, इस भरोसे रहते हैं कि कोई दूसरा हमारे मन की बात अपने मुँह से कह डाले, हमारी समस्याओं और पीड़ाओं भरे मन की थाह पाकर दूसरा ही कोई हमें राहत पहुंचाने के लिए प्रयास करें। हम अपनी छवि साफ-सुथरी, स्वाभिमानी और शहंशाही बनाए रखने के फेर में तटस्थता ओढ़ लिया करते हैं। ... Read More »

कायरता छोड़ें, दम-खम दिखाएं

विकास के हर संभव आधुनिक सरोकारों, वैश्विक स्तर की आकर्षक चकाचौंध, देह के हर अंग-प्रत्यंग को गुदगुदाकर आनन्द प्रदान करने वाले तरह-तरह के मनमोहक कोमलांग और मोहिनीरूपधारी कोमलांगियों का भरा-पूरा सहज उपलब्ध संसार, चम्पी करने वाले सिद्धहस्त लोग और ब्यूटी से लेकर बॉडी तक निखार देने वाले पार्लरों, अनगिनत किस्मों के संसाधन-उपकरण,  और हर प्रकार की अनुकूलताओं का मजा देने ... Read More »