Monthly Archives: March 2017

न देखें पीछे मुड़कर

काम-धंधे, नौकरी या यात्रा पर जाने के लिए घर की दहलीज से बाहर निकलने के बाद पीछे मुड़कर घर की ओर देखना नहीं चाहिए। इससे लक्ष्य प्राप्त करने में रुकावट आ सकती है। सीधा सा अर्थ है कि घर से निकलने के बाद कभी भी मुड़कर वापस घर की ओर नहीं देखना चाहिए। कई लोग घर से बाहर यात्रा पर ... Read More »

चाय पर चर्चा

बांसवाड़ा सूचना केन्द्र के बाहर थड़ी पर  दैनिक अर्जेन्ट टाईम्स के प्रधान सम्पादक  एवं मेरे आत्मीय भाई श्री चन्द्रकान्त डी. भट्ट के साथ चाय पर चर्चा का आनंद Read More »

धुलेण्डी का टोटका

जिस ग्रह को प्रभावी बनाना चाहें उसी से संबंधित रंग का धुलेण्डी पर अधिकाधिक प्रयोग करें।  प्रेम और सौहार्द की अभिवृद्धि के लिए शिवलिंग पर गुलाल चढ़ाने के बाद ही रंग-अबीर-गुलाल से होली खेलना आरंभ करें। अपनी राशि के अधिपति ग्रह से संबंधित रंग से होली खेलने पर साल भर अच्छा प्रभाव देखने में आता है। Read More »

परमाण्वीकरण करती है होली

यज्ञ हो अथवा होली, इसमें जो कुछ पदार्थ समर्पित किया जाता है वह धूम्र रूप में सूक्ष्मीकृत होकर परमाण्वीय क्षमता पा लेता है और व्योग में संग्रहित हो जाता है।  जब भी होता अर्थात समर्पित करने वाले को किसी बीमारी या संकट के समय जरूरत पड़ती है, तब मंत्रों के आवाहन करने पर सूक्ष्म किन्तु परमाण्वीय प्रभाव दिखता है। इसलिए ... Read More »

Special होली पर करें ये प्रयोग

होली कई प्रकार से हमारे जीवन के लिए लाभकारी है। जलती होली की सात या इससे अधिक विषम बार परिक्रमा करें। इससे आरोग्य, सु अपने जीवन की सभी प्रकार की बुराइयों का स्मरण करें और एक-एक बुराई के लिए एक-एक परिक्रमा करते हुए कोई न कोई हवनीय वस्तु होलिकाग्नि में स्वाहा कर दें।  इससे बुराइयों से मुक्त हो जाएंगे अथवा ... Read More »

कुत्ते की पूँछ (बुरा न मानो होली है )

देश के बुद्धिजीवियों, बुद्धिबेचकों, चिन्तकों, साहित्यकारों, इतिहासकारों आदि सभी से करबद्ध प्रार्थना है कि उत्तरप्रदेश के चुनावों से निकले निष्कर्षों को तहे दिल से समझने के लिए गंभीर चिन्तन करें और यह स्वीकार कर लें कि देश अब प्रगतिकारी करवट ले चुका है।  बचपन में किसी प्रसिद्ध कहानीकार की यह कहानी आज भी याद है जिसमें चौदह साल तक कुत्ते ... Read More »

अपने भीतर तलाशें रंग-रस

होली लोक जीवन के कई-कई रंगों और रसों का प्रतिनिधि वार्षिक पर्व होने के साथ ही धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष और आरोग्य से लेकर जीवन-रंगों के ढेरों रहस्यों से भरा हुआ पर्व है। इसे जानने, समझने और अभ्यास-अनुसंधान करते हुए जिन्दगी को सुनहरे रंगों और रसों से भरने की कला और रहस्यान्वेषण के विज्ञान को आत्मसात किया जाना जरूरी हो चला है। ... Read More »

होली के पैसे दो

बिना मेहनत-मजूरी किए रुपए-पैसे पाना और उगाहना सीधे तौर पर हरामखोरी है चाहे वह धन किसी त्योहार के नाम पर उगाहा जाए, प्रे्रम या दबाव से पाया जाए, किसी भी काम के लिए लिया जाए अथवा किसी व्यक्ति के नाम से लिया जाए। जिस धन में परिश्रम या पुरुषार्थ की गंध न हो वह जहां कहीं उपयोग में आएगा वहाँ ... Read More »

होली संस्कृति और परम्पराओं को सहेजें

जो पुराना है वह मौलिक और लोक के लिए होने के कारण ही आज भी माधुर्य से भरा और यादगार बना हुआ है भले ही उसका खास प्रचार नहीं हो पाया लेकिन अपने आप में वह सब कुछ अन्यतम और अद्वितीय है। होली के त्योहार से संबंधित धार्मिक, आध्यात्मिक, ज्योतिषीय, चिकित्सकीय और लोक व्यवहार के विभिन्न क्षेत्रों के अनुकूल कई ... Read More »

बेकार है इतना बड़ा होना

बड़े होने और दिखाने के लिए लोग बड़े-बड़े जतन करते हैं और जिन्दगी का बहुत बड़ा इसी में खर्च कर दिया करते हैं। बड़े-बड़े कहे जाने वाले लोगों की जिन्दगी का गहराई से अध्ययन किया जाए तो यही सामने आता है कि इन बड़े लोगों की जिन्दगी से वह आत्म आनन्द कोसों दूर चला जाता है जिसके लिए ये अपने ... Read More »