Monthly Archives: March 2017

हाहाकार

अब लगना-वगना पुरानी बातें हो चली हैं, अब तो महसूस होता है कि जैसे चारों ओर मचा हुआ है जबर्दस्त हाहाकार। न कोई शान्त है, न सन्तुष्ट। अपने आप से भी हम खुश नहीं हैं और अपनों से भी, परायों से तो खुशी पाने की कामना ही बेकार है। लगता है कि जैसे किसी का अपना कोई रहा ही नहीं, ... Read More »

महान रहस्य का उद्घाटन – नालायक पण्डित और बाबा ऎसे करते हैं टोटके

धन लोभ और प्रभावशाली वीआईपी से घनिष्टता बनाए रखने के चक्कर में इन विशिष्टजनों के कुकर्मों और पापों का भार उतारने के लिए कतिपय ढोंगी बाबा और धुतारे लोभी पण्डित ऎसे कई सारे टोटके करते हैं जिनके कारण से बेचारे नासमझ और भोले-भाले लोगों को दुःखी होना पड़ता है। ये वीआईपी कहे जाने वाले बड़े और महान लोगों की प्रतिष्ठा ... Read More »

भिखारी मुक्त हो भारत

यों तो अपने यहाँ भिखारियों की अनगिनत किस्में हैं जो यत्र-तत्र-सर्वत्र विद्यमान भी हैं और विचरणरत भी हैं लेकिन मूल रूप से दो तरह के भिखारी हैं। एक वे हैं जिनका स्वभाव, मन-मस्तिष्क, व्यवहार और तमाम प्रकार के आचरण भिखारी परंपरा को धन्य कर रहे हैं लेकिन ये भिखारी न तो अपने आपको भिखारी मानते हैं न भिखारी कहने देते ... Read More »

शत्रु या मित्र वही जो हो बराबरी का

हम चाहे जिसे मित्र या शत्रु मान लिया करते हैं यही हमारी सबसे बड़ी भूल है।  दुनिया में प्रेम सभी से हो किन्तु विश्वास या श्रद्धा के लिए पात्रता का परीक्षण पहले जरूरी है। इसी प्रकार शत्रु या मित्र भी वही हो सकता है जो कि हमारी बराबरी का हो। आजकल मित्रता और शत्रुता के गहन अर्थ से नासमझ लोग ... Read More »

सबसे बड़ा सुकून – घर और घरवाले

इंसान की पूरी जिन्दगी में बाकी सब कुछ मिल जाए लेकिन घर और घर वाले न मिल पाएं, तो जिन्दगी बेकार ही अनुभव की जाती है। पहले ठिकाने की तलाश फिर ठिकानेदारों की। घर होगा तो घरवाले भी होंगे ही। लेकिन घर ही नहीं होगा तो चाहे पूरी दुनिया हमारी क्यों न हो जाए, हम बेघर ही कहलाएंगे। दुनिया के ... Read More »

घर घुस्सू ये मोबाइल पिस्सू

जहाँ जड़ता वहाँ सब कुछ जाम। इसीलिए कहा गया है कि बहता पानी और रमता जोगी। जहाँ हर प्रकार का प्रवाह निरन्तर बना रहता है वहाँ पवित्रता और ताजगी का ज्वार उमड़ता रहता है। पंच तत्वों से जो भी बने हैं उन सभी के लिए यह शाश्वत संदेश है कि जड़त्व से मुक्त होकर जहाँ रहें वहाँ प्रवाहमान रहें और ... Read More »

तैयार हो रहे हैं विषधर भुजंग

आने वाला समय विषधारी भुजंगों का होगा और सभी को ऎसा प्रतीत होने लगेगा कि जैसे पाताल से नाग लोक ऊँचा उठकर धरती पर ही आ गया है। चौतरफा हालात ऎसे ही पैदा हो रहे हैं कि जैसे भुजंगों के अवतरण की भूमिका आकार ले रही हो। सब तरफ के बाड़ों, परिसरों और गलियारों में काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद ... Read More »

इसलिए उठती है स्वाद की तलब, जगता है आकर्षण

हम जिस प्रकार के खान-पान का स्वाद रोजाना लेते हैं उनसे एकदक अलग हटकर यदि स्वाद आ जाता है तब शरीर की सभी लार ग्रंथियां अत्यधिक सक्रिय होकर उत्तेजना पैदा करने लगती हैं और इसका शरीर को अजीब सा नया आनंद प्राप्त होता है। यही कारण है कि अन्यतम आनंद की प्राप्ति हमारे आकर्षण को बढ़ा देती है। इसीलिए यह ... Read More »

व्यंग्य लेख …. यह है चमत्कार – गधों के श्राप का

आखिर देख ही लिया न गधों के श्राप का परिणाम। और वह भी कोई एक गधे या गधी का नहीं, पूरी की पूरी गधा प्रजाति जब रुष्ट हो जाती है तब कितना बड़ा भूकम्प ला देती है, यह बात इतिहास सदियों तक सुनाता रहेगा। गधों की महिमा के बखान का यह ऎतिहासिक चमत्कार पूरी की पूरी गधा प्रजाति के लिए ... Read More »

प्रेम रस वृष्टि करता है यह महामंत्र

ॐ क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतक्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः। धुलेड़ी के दिन इस मंत्र से भगवान श्रीकृष्ण के चरणकमलों में लाल गुलाल चढ़ायें।  इससे प्रेम बढ़ता है और हमारा व्यक्तित्व प्यार से भर उठता है। प्रेम मिलता भी है और प्रेम बाँटने का अक्षय स्रोत भी प्राप्त होता है। https://youtu.be/fk6edAMEuIE Read More »