Monthly Archives: February 2017

भौंकने वाले साहब

कोई भी इंसान अपने वर्तमान जन्म में जो कुछ भी व्यवहार करता है उसमें से काफी कुछ हिस्सा उसके पूर्वजन्म का होता है। पूर्वजन्म के बहुत सारे गुणावगुण जीवात्माओं में मौलिक रूप से स्थानान्तरित होते हैं और इन्हीं के आधार पर वर्तमान जन्म की बुनियाद स्थापित होती है। जो जीवात्माएं पूर्व जन्म में अच्छे परिवारों में पैदा हुई होती हैं ... Read More »

सब जगह मुँह न मारें

हर इंसान का अपना कोई न कोई विशिष्ट मौलिक गुणधर्म होता है जिसे अपनाकर वह जीवन लक्ष्यों में सफलता अर्जित करने की दिशा में बढ़ता है और उपलब्धियों के साथ आगे से आगे निखरता और प्रतिष्ठा पाता चला जाता है। मौलिकता अपने आप में इंसान की वह वैयक्तिक खासियत है जो उसे नाम और पहचान दिलाती है बशर्ते की वह ... Read More »

हमसे बड़ा आदमखोर कौन ?

आदमखोर …  आदमखोर … आदमखोर…। पिछले कुछ समय से यह शब्द जंगलों से लेकर बस्तियों तक जबर्दस्त गूंजने लगा है। आदमखोर की तलाशी भी इन दिनों सबसे बड़े अभियान के रूप में चर्चित है। आदमखोर की थाह पाने के लिए आज इस, और कल उस जंगल की खाक छानी जा रही है फिर भी अधिकांश बार निराशा ही हाथ लग ... Read More »

डूबो देते हैं आस-पास वाले ही

इतिहास भरा पड़ा है उन लोगों से जो अपने आप में बहुत अच्छे थे मगर असामयिक बरबादी के मंजर में खो गए। और यह सब अपने किसी अपराध या गलती से नहीं बल्कि उन लोगों के कारण से हुआ जो उनके आगे-पीछे घूमते रहने, साथ में और आस-पास बने रहने वाले थे। डूब जाने वाले और बरबाद हो जाने वालों ... Read More »

जरूरी है आत्म जागरण

जो कुछ सुखद और सकारात्मक परिवर्तन आते हैं, जो कुछ भी मनोकामनाएं और संकल्प पूरे होते हैं, उन सभी के पीछे कोई बाहरी ताकत नहीं होती बल्कि पिण्ड की शक्ति से ही सब कुछ संचालित होता है। बाहरी तत्वों का काम केवल उत्प्रेरक जैसा है जो कि केवल आत्म जागरण का अहसास कराने भर तक ही उपयोगी रहता है, काम ... Read More »