Monthly Archives: February 2017

यों ही बरबाद होती है ड्यूटी चोरों की कमाई

धर्म, अर्थ, कर्म और मोक्ष इन चारों विषयों का अपना-अपना अनुपात निर्धारित है। जो इंसान इस संतुलन को बनाए रखता है उसका जीवन राजी-खुशी चलता रहता है लेकिन इनमें से किसी भी एक को अधिक तवज्जो दी जाती है तब संतुलन बिगड़ जाता है और पूरी जिन्दगी का अनुपात गड़बड़ा जाता है। वर्तमान युग में केवल अर्थ को प्रधानता दी ... Read More »

जल्द होना चाहिए इनका राम नाम सत्य

बदतमीज और बदमिजाज लोगों की मौजूदगी और प्रभाव के लिए हम सभी दोषी हैं जो इन्हें बर्दाश्त करते हैं और इन्हें कुछ कह पाने का साहस नहीं कर पाते हैं। और यही कारण है कि एक अच्छा सा मुकाम पा चुके लोग भी जाहिलों की तरह पेश आते हैं और चाहे जिसको कुछ भी बक डालते हैं। यों देखा जाए ... Read More »

वास्तु अनुकूल बनाने के सहज उपाय काम में लें

वास्तुशास्त्री पं. नरहरिकान्त आर. भट्ट (बाँसवाड़ा) के अनुसार –   – वास्तु दोषों के निवारण में घर के द्वार पर पारम्परिक घण्टी लगाने से घर के स्वामी को ऊर्जा मिलती है और वास्तु दोष निवारण होता है। – इसी प्रकार घर में छींके लटकाने से ताजगी भरी ऊर्जा और उत्साह का प्रभाव बना रहता है। –  द्वार दोष होने पर ... Read More »

बिना तोड़-फोड़ हो सकता है वास्तु दोषों का निवारण

  जाने-माने वास्तुविद एवं  ज्योतिषी डॉ. भगवतीशंकर व्यास (उदयपुर) का मानना है कि  – भवनों में वास्तुदोषों का निवारण बिना किसी तोड़-फोड़ या खर्च के आसानी से संभव है और इसके लिए विभिन्न उपायों को काम में लाया जा सकता है। वास्तुदोष वाले विभिन्न प्रकार के भवनों में बिना किसी मेहनत व खर्च के वास्तुदोषों के त्वरित और प्रभावी निराकरण ... Read More »

व्यंग्य – आइये महान ज्योतिषी बने

ऎषणाओं की प्रतिमूर्ति बनते जा रहे मनुष्य में भविष्य जानने की लालसा जाने कितने युगों से रही है। ऎसे में ज्योतिष का प्रभाव दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। आजकल ज्योतिष के नाम पर जानकारों की बाढ़ आ गई है, जगह-जगह कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं ज्योतिषी। इसके साथ ही हस्तरेखाविद् बनने का शौक भी हर कहीं परवान ... Read More »

जल्द होना चाहिए इनका राम नाम सत्य

बदतमीज और बदमिजाज लोगों की मौजूदगी और प्रभाव के लिए हम सभी दोषी हैं जो इन्हें बर्दाश्त करते हैं और इन्हें कुछ कह पाने का साहस नहीं कर पाते हैं। और यही कारण है कि एक अच्छा सा मुकाम पा चुके लोग भी जाहिलों की तरह पेश आते हैं और चाहे जिसको कुछ भी बक डालते हैं। यों देखा जाए ... Read More »

फँसे रहने दो दलदल में

इंसान का स्वभाव ही जिज्ञासाओं और अज्ञात के बारे में जानने-समझने और अनुभव करने का रहा है। हर श्रेणी का मनुष्य जब तक अपने मन की कल्पनाओं और जिज्ञासाओं को पूरी तरह समझ नहीं लेता तब तक उसका चित्त उन्हीं विचारों में खोया रहता है। एक औसत आदमी अपने बारे में केवल पाँच फीसदी सोचता है, शेष वह औरों के ... Read More »