Monthly Archives: February 2017

सच्चे और ईमानदार हैं तो भय मुक्त रहें

भय केवल अपराधियों को ही रखना चाहिए। चाहे वे सार्वजनीन अपराधी हैं अथवा आत्म अपराधी। पूरी दुनिया दो तरह के लोगों में विभाजित है। एक तरफ चोर-उचक्के, बेईमान-लूटेरे, भ्रष्ट-रिश्वतखोर और आपराधिक चरित्र वाले विद्यमान हैं और दूसरी तरफ सज्जन, चरित्रवान और ईमानदार। इन दोनों के बीच यानि की अच्छों और बुरों के मध्य हमेशा संघर्ष होता रहा है। राम-रावण, कृष्ण-कंस ... Read More »

राष्ट्रीय स्तर पर बांसवाड़ा की अभिनव पहल

पीताम्बरा सुरक्षा कवच अभियान कलियुग के प्रभाव और आसुरी शक्तियों के प्रसार की वजह से आजकल हममें से काफी लोग बेवजह परेशान, तनावग्रस्त और दुःखी रहते हैं। खासकर ईमानदार, सज्जन और निष्ठावान लोगों के लिए संकट का दौर हमेशा बना रहता है। लेकिन संगठन के अभाव की वजह से हम लोग आसुरी शक्तियों, संवेदनहीन और दुष्ट लोगों का मुकाबला नहीं ... Read More »

प्रवाह का सम्मान करें – कर्म को भोग लें, टालें नहीं

जब तक कर्म को जीवात्मा पूरी तरह भुगत नहीं लेते तब तक आगे से आगे चलते रहते हैं। कारण यह है कि कोई से कर्म का अच्छा-बुरा फल सामने आने पर अच्छे फल को तो हम प्रसन्नतापूर्वक भुगत लेते हैं और आनंदित होते हैं लेकिन पाप कर्म की वजह से दुःख आने पर भगवान से अनुनय विनय करते हैं कि इसे ... Read More »

अध्यात्म चिन्तन – समर्पण प्रयोग

जो झोली पुण्य या पाप की हमारी है उसे पूरी तरह खाली किए बिना नया कुछ भी सृजन नहीं होता। पहले पुराना साफ होगा, फिर नया भरेगा। नया कुछ अच्छा बन भी जाएगा, तब भी क्यू में जो पहले के हैं उन्हें ही भुगतना पड़ेगा। सुख और दुःख जहां रखे हैं उन्हीं रास्तों से होकर इन्हें भोगते हुए आगे बढ़ना ... Read More »

चिन्तनपरक आलेख लेखन के छह वर्ष पूर्ण

प्रसन्नता है कि रोजाना औसत हजार शब्दों वाले चिन्तन आलेख का जो दौर जैसलमेर में 26 फरवरी 2011 को आरंभ किया था वह अब सातवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इससे पूर्व मेरे लेखन में वागड़ अंचल का बहुआयामी परिदृश्य समाहित था। अस्सी के दशक से लगातार लेखन प्रक्रिया जारी रही। इसी बीच सन् 2011 में मेरे एक लेखक ... Read More »

जन्मदिन को यों बनाएं खास

गौसेवा अनुष्ठान करें, साल भर स्वस्थ-मस्त रहें अपने जन्मदिन को खास बनाते हुए इस अवसर को साल भर के लिए सुकूनदायी बनाएं। इससे पूरे वर्ष यश-कीर्ति, आरोग्य और आनंद का सहज-स्वाभाविक प्रवाह बना रहता है और अरिष्ट-अनिष्ट तथा तमाम प्रकार की आपदाओं-दुर्घटनाओं से बचा रहा जा सकता है। अपने जन्म की दिनांक या तिथि के दिन अपनी आयु या वजन ... Read More »

मनोरोगी होते हैं फालतू बोलने-सुनने वाले

काम करने वाले इंसानों के मुकाबले बातें करने वाले लोगों का प्रतिशत कहीं ज्यादा है। यों कहें कि काम करने वाले केवल दस फीसदी हैं और शेष सारे हैं बातें करने वाले। फिर जो बातें करने में उस्ताद होता है वह सुनने के मामले में भी उतना ही अधिक आतुर रहा करता है। आदमी जितना काम नहीं करता उतना बातें ... Read More »

दिली उद्गार – कृतज्ञता परमो धर्म

मैं उन सभी के प्रति विनम्र भाव से, हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ जिनकी आत्मीयता, चाहत, प्रेम और सद्भाव ने मुझे हमेशा आनंदित किया है। इन्हीं सज्जनों और आत्मीयों ने अपनी भरपूर क्षमाशीलता, सहनशीलता, सहिष्णुता और सदाशयता का परिचय देते हुए दिव्य आनंद की स्नेहवृष्टि का अनिर्वचनीय सुख प्रदान किया है। मैं उन सभी के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त ... Read More »

कायरों के कवच-कुण्डल हैं सहिष्णुता और शालीनता

दुनिया के तमाम बुद्धिजीवी, प्रबुद्धजन और बुद्धिबेचक तटस्थ लोग सहिष्णुता, शालीनता, धीर-गांभीर्य और अहिंसा के उपदेशों की बाढ़ ला रहे हैं, कोई मानवाधिकारों की बात कहता है, कोई संस्कारों की। कोई आदर्शों और सिद्धान्तों की बातें करता है, भाषा में शालीनता और सौम्यता पर जोर देता है और बहुत सारे लोग मूकदर्शक होकर चुपचाप बैठ जाने की सीख देते हैं। ... Read More »

लघु कथा – वरदान

रात के चौथे पहर में गहरी नींद में सो रहे माईक वाले को भगवान ने जगाया। कहा – वत्स मांगों वरदान ! मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत खुश हूँ। माईक वाला – प्रभु मैंने कुछ नहीं किया, मैं वर पाने लायक कहाँ ? शिवजी – नहीं वत्स ! तू ने दोहरी-तिहरी भक्ति का पुण्य कमा लिया है। तेज आवाज वाला ... Read More »