Monthly Archives: December 2016

अनूठा प्रयोग – यों करें गुस्से को शान्त

जब भी किसी बात पर गुस्सा आए या और कोई हम पर गुस्सा होने की कोशिश करे, मन ही मन तीन बार निम्न मंत्र का जप कर लें। खुद का क्रोध भी खत्म हो जाएगा और सामने वाला भी गुस्सा करना भुल जाएगा। कई बार हमें यह आशंका रहती है कि जिससे मिलने जा रहे हैं वह गुस्सा तो नहीं ... Read More »

यों पाएँ परम आनन्द

हम सभी के पास वह सब कुछ है जिससे हम आनन्द को प्राप्त करते हुए जीवन को सफल बना सकते हैं लेकिन हमारा दुर्भाग्य कहें या आत्महीनता कि हम अपने आपको भी पहचान नहीं पा रहे हैं और हमें जो कुछ प्राप्त है उसका उपयोग करते हुए आनन्द पाना भी भूल गए हैं। वरना हम सभी के पास आनंद का ... Read More »

बर्दाश्त न करें मक्कार खटमलों को

अनुशासन, मर्यादा और आदर-सम्मान ऎसे शब्द हैं जो उन्हीं लोगों के लिए उपयुक्त और सटीक लगते हैं जो लोग वाकई इसके योग्य हैं और जिन्हें देखकर मन में श्रद्धा या स्नेह जगता है। संसार में जिन लोगों से मिलकर, जिनके साथ काम कर अच्छा अनुभव होता है, प्रेम, माधुर्य और सहयोगी माहौल मिलता है, वे ही लोग अच्छे हुआ करते ... Read More »

रविवार को करें सूर्य आराधन

चेहरे का ओज-तेज, आँखों की ज्योति, बुद्धि, आरोग्य प्राप्ति, कार्यसिद्धि पाने के लिए भगवान सूर्य को अघ् र्य  प्रदान करें। उषा काल में तीन बार और उसके बाद चार बार अघ् र्य दें। चौथा अघ् र्य प्रायश्चित के लिए है। अघ् र्य से मतलब है अभिमंत्रित जल का समर्पण। पानी भरे लोटे में लाल चन्दन, इत्र और अक्षत डालकर उसमें ... Read More »

यों पाएं कालसर्प पर काबू

कालसर्प से अधिक घबराने की जरूरत नहीं है। अपने उस किसी भी देवी या देवता के छोटे से मंत्र का रोजाना 11 बार जप कर लें जिनके पास सर्प हो। जैसे शिवजी के गले में रहता है। ॐ नमः शिवाय के जप कर सकते हैं। अपने आस-पास की किसी बड़ी नदी में हर पखवाड़े स्नान कर लें और पानी में ... Read More »

देवरों को धोक लगाएँ भौंपों को आदर दें

पहले कुछ ही देवालय और देवरे हुआ करते थे इसलिए किसी को कोई दिक्कत नहीं होती थी, जिधर से गुजर रहे हों उधर चार-पाँच देवरों के समक्ष हाथ जोड़ लिया करते थे, समय हो तो एक बार अंदर जा आएं, और अंदर न भी जा पाएं तो कम से कम उस दिशा में राम-राम तो कर ही लिया करें। और ... Read More »

नरपिशाच ही हैं ये

सच्चा और वास्तविक इंसान वही है जो अपने सम्पर्क में आने वाले हर प्राणी को प्रेम, स्नेह, श्रद्धा और आनंद प्रदान करता हुआ इतना अधिक खुश कर दे कि हर कोई उससे बार-बार मिलने की तीव्रतर इच्छा रखे और जीवन भर श्रद्धा से याद रखे। एक इंसान को दूसरे इंसान या इंसानों के समूह से मिलकर दिली प्रसन्नता का अनुभव ... Read More »

ये हैं असली दिव्यांग

इंसान के रूप में वही सफल है जो इंसानियत के तमाम गुणधर्मों के साथ अकेले के दम पर वह सब कुछ कर सकने में समर्थ हो जो सामान्य जिन्दगी के बेहतर निर्वहन के लिए जरूरी हो तथा कोई सा काम अटके नहीं, किसी और की जरूरत न पड़े। पुरुषार्थी और कर्मयोगी लोग ऎसे ही होते हैं जो अकेले ही खुद ... Read More »

खुद ही तय करें अमृत उगलें या जहर

मनुष्य का शरीर अपने आप में दैवत्व से परिपूर्ण देवालय भी है और आसुरी शक्तियों का स्थान भी। मनुष्य को इस बात की पूरी स्वतंत्रता है कि वे किसे अंगीकार करे, दैवत्व या राक्षसत्व। हर इंसान के लिए दोनों तरफ के रास्तों को स्वीकार करने और उन पर चलने के लिए अपार संभावनाएं हैं जिनका अवलम्बन वह कर सकता है। ... Read More »