Monthly Archives: August 2016

धर्म, सत्य और न्याय का मार्ग ही श्रेयस्कर है

देश में बहुत कम लोग बचे हैं जिनमें खुद्दारी है, स्वाभिमान से जीने का माद्दा है। मध्यम मार्ग की बात वे लोग करते हैं जो या तो वर्णसंकर हैं या फिर भ्रष्ट, बेईमान, चोर-उचक्के और मुर्दाल लोग। जो लोग स्वाभिमान शून्य हैं, प्रतिभाहीन हैं, भगवान की कृपा से वंचित हैं, जिनके पुरखों ने देश या समाज के लिए कभी कोई ... Read More »

ये बीमारू मकड़ियाँ

दुनिया भर में स्वच्छता और सेहत की चाहे लाख बातें होती रहें, कितने ही अभियान चलते रहें, गांव के गांव और शहर के शहर स्वच्छ घोषित क्यों न होते रहें मगर इंसानों की एक प्रजाति इतनी जबर्दस्त है कि इन्हें न स्वच्छता से कोई सरोकार रहता है, न सेहत से। तकरीबन हर बाड़े में ऎसे दो-चार लोग होते ही हैं ... Read More »

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ ….

भ्रष्ट, रिश्वतखोर, कमीशनबाज, देशद्रोही विचार रखने वाले, व्यभिचारी और दुष्ट लोगों को भाई समझ कर राखी बाँधना सामाजिक अपराध है। चाहे हमारा यह कृत्य औपचारिकता निभाने और पब्लिसिटी पाने के लिए ही क्यों न हो। बहनें और यजमान पहले अच्छी तरह परख लें कि  जिसे राखी बाँध रहे हैं वह योग्य तो है, माँ-बहन-बेटियों की रक्षा में विश्वास करने वाला ... Read More »

बेमानी है राखी यदि बहनें व्यथित हैं

राखी को भाई-बहनों के माधुर्य और एक-दूसरे का भरपूर ख्याल रखने, सुरक्षा करने और पारस्परिक तरक्की को आकार देने का वार्षिक महापर्व माना जाता है। जाने कितनी पौराणिक कहानियों, ऎतिहासिक कथानकों और परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए यह रक्षाबंधन पर्व सदियों से चला आ रहा है। कितने ही प्रकार के संदेश लेकर यह आता है, संकल्पों की एक दिवसीय ... Read More »

आदमी तो आदमी है

आदमी तभी तक चुप  रहता है जब तक पराये संसाधनों से उसकी भूख-प्यास बूझती रहती है और किसी को पता भी नहीं चलता। जब भी इसमें कोई बाधा आती है या कोई खलल डालता है अथवा कोई उसकी हरकतों को जान लेता है, वह अपने आपको पाक-साफ दिखाने के लिए चिल्लपों मचाता रहता है।  बहुत से लोग हैं जो सब ... Read More »

काव्य धारा

वाह-वाह   साँपों और अजगरों से पूछा, पैथरों से जाना राज आखिर क्यों चले आते हो बस्तियों में मिला जवाब यों – गंध खींच लाती है इधर, लगता है हम जंगलियों का खानदान अब वहां बसने लगा है। Read More »

जरूरी है वास्तु पूजा एवं यज्ञ-अनुष्ठान

एक बार मकान, दुकान या कोई सा भवन हो, उसमें प्रवेश से पूर्व वास्तु पूजन, यज्ञ-अनुष्ठान जरूरी होता है।  भवन चाहे कोई सा हो, घर हो, दुकान हो या और कोई सा। इनमें बाद में कहीं भी किसी भी प्रकार की तोड़-फोड़ या नवनिर्माण किए जाने पर दुबारा पूजन-हवन,  सामूहिक भोज आदि जरूरी होता है। लोगों में आम धारणा यह ... Read More »

कड़वी-तीखी बात – सत्यमेव जयते …

सत्य हमेशा कड़वा होता है। इसे सुनना और गुनना वे ही कर सकते हैं जो लोग दिल और दिमाग से कमजोर न हों, जिनका अर्थिंग पॉवर मजबूत हो। अन्यथा अधिकांश लोग तो सत्य का कतरा मात्र सामने आ जाने पर भौं-भौं करने लगते हैं, हिंसक और खूंखार हो उठते हैं और अपनी भीतर की सारी पशुता को प्रकट कर देते ... Read More »

उपनयन संस्कार अधूरा है इन सभी का

आजकल यज्ञोपवीत संस्कार (उपनयन संस्कार) की वैदिक प्रक्रिया  केवल औपचारिकता मात्र होकर रह गई है। इसमें गौ घृत, गौमूत्र एवं गोबर आदि की आवश्यकता होती है। लेकिन देखा यह जाता है कि इनका कोई प्रयोग नहीं होता। इससे इन सभी लोगों की यज्ञोपवीत विधि झूठी, पाखण्ड भरी और केवल औपचारिकता मात्र है। नितान्त जरूरी उपचारों से के बिना किया गया ... Read More »

अनुभव

अपने किसी भी लेखन को स्थायी महत्व का और प्रभावकारी बनाना चाहें तो स्याही अथवा जैल पेन से लिखें। हस्ताक्षर भी इसी से करें। यह लेखन सरसता के साथ अक्षयकीर्ति और सफलता प्रदान करता है। बाल पेन से लिखा गया उतना असर नहीं छोड़ता। Read More »