Monthly Archives: April 2016

सकारात्मक चिन्तन अपनाएं, छवि सकारात्मक बनाएं

आजकल जीवन निर्वाह के तमाम क्षेत्रों में सभी लोग उपदेशक की तरह व्यवहार करने लगे हैं जैसे कि वे राजा हरीशचन्द्र जैसे ईमानदार, कर्ण की तरह दानी और पौराणिक पात्रों की तरह कर्मयोगी हों। कोई शिकायत सुनना नहीं चाहता, समस्या सुनना नहीं चाहता, सच को सुनना भी नहीं चाहता।  ऎसे सारे तटस्थ और उदासीन लोग अपने संपर्क में आने वालों ... Read More »

राम का नाम बदनाम न करो

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हमारे आदि आराध्य हैं और रहेंगे। राम की लीलाएं, रामचरितमानस और रामकाल से संबंधित पात्रों का जीवन परिचय हम सभी के लिए मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।राम का नाम अपने आप में सिद्ध महामंत्र है जिसे तारक मंत्र भी कहा जाता है। यह समस्त प्रकार की विपदाओं से तारता व आनंद प्रदान करता है।  ... Read More »

रामनवमी का प्रयोग – राम कृपा चाहें तो यह करें …

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की कृपा से वैयक्तिक समस्याओं, दैहिक, दैविक एवं भौतिक संतापों, अभावों आदि से मुक्ति प्राप्त होती है और आनंद भाव का अनुभव होता है। आज रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम के जन्मसमय दोपहर 12 से 1 बजे तक की अवधि में राम-राम अथवा  श्रीराम जय राम जय जय राम के सामूहिक मंत्र जप करें अथवा श्रीरामरक्षा ... Read More »

दासत्व दर्शाता है मूक द्रष्टा भाव

  लोग इन्हें भले ही होशियार, चतुर, शातिर और धीर-गंभीर कहें, कहते रहें, पर असल में उस इंसान कहे जाने वाले जिस्म का क्या अर्थ है जो जमाने या आस-पास की हलचलों पर किंचित मात्र भी प्रतिक्रिया व्यक्त न करे। अच्छे को अच्छा न कहे, बुरे को बुरा कहने में शर्म आए। या फिर राम की भी जय और रावण ... Read More »

धर्म विरूद्ध है आतिशबाजी

धर्म विरूद्ध है आतिशबाजी आतिशबाजी धर्म संगत नहीं है। कोई भी ऎसा काम जो किसी भी जीव (इंसानों से लेकर पशु-पक्षी और जलचर सभी)  की शांति भंग करता है वह धर्म विरूद्ध है।  धर्म के नाम पर मूर्खता करने वाले जड़ मूर्खों और नौटंकीबाजों की वजह से से ही केरल हादसा हुआ। किसने कहा था कि आतिशबाजी करो।  जिस शादी-ब्याह ... Read More »

भीषण गर्मी से राहत दिलाएं

सेवा और परोपकार के अवसर हमेशा अनन्त बने रहते हैं। यही एक ऎसा क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं हरदम बनी रहती हैं और असंख्य अवसर उपलब्ध रहते हैं। चाहे कोई सा युग हो, कैसा भी क्षेत्र हो, इसमें कभी कोई कमी नहीं आती।सेवा धर्म के लिए न भीड़ की कोई जरूरत रहती है न रुपए-पैसों की, और न ही समय ... Read More »

बीच में न आए कोई तीसरा

नवरात्रि हो या और कोई सा पर्व, भक्ति, भगवान और धर्म के नाम पर साल भर कुछ न कुछ होता रहता है फिर भी हम अपने जीवन से संतुष्ट नहीं हैं। न आस-पास के लोगों से प्रसन्न हैं, न परिवेश की हलचलों से। रोजाना दीये और अगरबत्ती जलाते हैं, परिक्रमाएं करते हैं, पानी चढ़ाते हैं, पूजा और श्रृंगार के नाम ... Read More »

अब नहीं रहा कुत्तों का कोई धर्म

कुत्तों का अपना कोई धर्म नहीं होता। पहले जमाने में कुत्ते चोर-डकैत देखकर भूंकते थे, हिफाजत करते थे, स्वामीभक्त हुआ करते थे। जब से झूठे, लफ्फाज, बेईमानों, भ्रष्टाचारियों, रिश्वतखोरों, कमीशनबाजों और हरामखोरों की झूठन खाने लगे हैं तब से कुत्तों के बचे-खुचे गुण भी खत्म हो गए हैं। अब तमाम किस्म के कुत्तों के लिए झूठन और खुरचन खाने और ... Read More »

असली देशद्रोही तो ये लोग हैं

देशद्रोहियों, संस्कृति नाशकों और विधर्मियों को बाहर कहीं तलाशने की आवश्यकता नहीं है। हमारे अपने कहे जाने वाले उन महान, पॉवर युक्त और बड़े लोगों को देख लीजियें जो हमें शक्तिहीन करने के लिए न हमारे धर्म-कर्म की स्वतंत्रता बरकरार रखने  देते हैं, न हमें पूजा-पाठ करने देते हैं, न हमें अपने उन अवकाशों को भुगतने देते हैं जिनका उपयोग ... Read More »

कुछ न छिपाएं …

आनंद पाने के लिए सभी लोग उतावले रहते हैं। सभी को आनंद पसंद है और इसके लिए सभी उस हर रास्ते, सूत्र, इंसान और संसाधनों को पकड़ने के लिए हरचन्द कोशिश करते हैं जहां से आनंद प्राप्ति की गुंजाइश हो। क्षणिक और आयातित आनंद का वजूद अधिक देर तक नहीं रहता। न इंसानों से प्राप्त आनंद स्थायी रह पाता है, न ... Read More »