Monthly Archives: April 2016

सिद्धि पाना सहज, यदि शुचिता बनी रहे

साधना को लेकर अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसके लिए बहुत सारा समय चाहिए। खूब सारे बंधनों और मर्यादाओं के पालन की जरूरत है। मनोकामना पूर्ति या सिद्धि पाने के लिए दीर्घकाल तक कठोर साधना करने की जरूरत पड़ती है। इसी सोच के मारे अधिकतर लोग साधना को दुश्कर मान कर इस दिशा में आगे बढ़ते ही नहीं, बहुत ... Read More »

बढ़ते जा रहे हैं बवाली और मवाली

लोगों की जीवनीशक्ति और कर्तव्य परायणता अब खत्म होती जा रही है। इस वजह से अब कोई काम या सेवा करना नहीं चाहता। जिन लोगों को भरपूर मेहनताना मिल रहा है वे भी काम नहीं करना चाहते, और दूसरे लोग भी परिश्रम से जी चुराते हैं। जिन्हें आवश्यकता है वे भी चाहते हैं कि पकी पकायी मिल जाए, और जिन्हें ... Read More »

परफेक्शन की प्रतीक्षा न करें

खूब लोगों की आदत होती है कि कोई सा काम हाथ में ले लेते हैं तब उसे बेहतर और चरम गुणवत्ता के स्तर पर लाने तक के लिए लम्बा समय गुजार देते हैं।इसका हश्र यह होता है कि वह समय निकल चुका होता है जिस वक्त इस काम की आवश्यकता होती है अथवा उपयोगिता। ऎसे ढेरों काम हमारे जीवन के ... Read More »

विरोधी अमर रहें, चुनौतियाँ बनी रहें

सृष्टि में जागरण हो तभी नवप्रभात का अहसास होता है अन्यथा बहुत सारे लोग हैं जिनके भाग्य में उषाकालीन सूर्य के दर्शन नसीब नहीं हैं। हर इंसान के जीवन में रोजाना नवप्रभात का सुनहरा सूरज उगता है, कुछ लोग इस शाश्वत सत्य को स्वीकार कर उसका लाभ लेते हैं और दूसरे सारे बिना अंधकार के उदासीनता की चादर ओढ़कर भोर के ... Read More »

दासत्व भाव अंगीकार कर चुके सभी मुर्दालों को समर्पित

औरों की देखादेखी करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। हम खुद कोई पहल करने को तैयार नहीं होते। हम सोचते हैं कोई तो पहल करे और हम उसके पीछे-पीछे हो लें। अच्छा लगे तब तक साथ चलते रहें, न लगे जो मुंह फेरकर भला-बुरा कहते हुए लौट जाएं और अलाप करते रहें। यह सब स्थितियां देश के उन सभी ... Read More »

इसे धर्म कहना बेमानी है

इसे धंधा कहा जाना अधिक उपयुक्त होगा। असल में वे लोग भगवान के शत्रु ही हैं जो भगवान को पैसा दान देते हैं, भगवान के प्रसाद को बेचते हैं। जिन मन्दिरों में वीआईपी दर्शन का रिवाज है, प्रसाद को पैसों में बेचा जाता है उन मन्दिरों से भगवान पलायन कर जाता है। इन मन्दिरों की मूर्तियां शो केस में रखे ... Read More »

धर्म चर्चा – सदा सूतकी होते हैं ये लोग

अपने निकटतम परिजन की मृत्यु पर जो लोग मुण्डन नहीं कराते हैं वे लोग जिन्दगी भर सदा सूतकी होते हैं। इन लोगों को किसी भी दैव कर्म का कोई अधिकार नहीं होता क्योंकि इनके केश में सूतक और पाप राशि जमा रहती है।   ऎसे सदा सूतकी लोगों के साथ खान-पान और व्यवहार भी अपने संचित पुण्यों का नाश करने वाला ... Read More »

डस्टबिन रोज होनी चाहिए खाली

घर-दुकान-दफ्तर कहीं भी कूड़ा-कचरा हो, इसकी रोजाना सफाई होनी चाहिए। अन्यथा नकारात्मक शक्तियों के लिए ये स्थान अनुकूल हो जाते हैं और उनका आवागमन बना रहता है। लगातार यही स्थिति बनी रहने से वह स्थान भूत-प्रेतों और गंदी हवाओं का डेरा बन जाता है।  यही वजह है कि जहां डस्टबिन में पड़ा कचरा रोज खाली नहीं होता, वहां बीमारियां, तनाव ... Read More »

सुपर आईडिया – साल भर में पसर सकता है सुकून देश भर में

कोई मांग पूरी न करो, कोई रोजगार न दो, खान-पान और आवास से लेकर कोई और प्रबन्ध न करो। देश भर के लोगों को अच्छा सा स्मार्ट फोन दे दो, और दो-तीन साल के लिए पूरे देश के महानगरों, शहरों, कस्बों, गांवों से लेकर दूरदराज की ढाणियों, पहाड़ों, दुर्गम स्थलों तक में 4 जी का मुफ्त नेटवर्क दे दो। फिर ... Read More »

धर्म चर्चा – पूजा-अनुष्ठान में वर्जित है लूंगी

बहुत से लोग पूजा-अनुष्ठान करते हैं तब धोती या पीताम्बर को लूंगी की तरह पहनते हैं। ऎसा करना वर्जित है। लूंगी पहन कर की जाने वाली पूजा का कोई फल प्राप्त नहीं होता। ऎसे लोग पिशाच योनि को प्राप्त होते हैं। धोती या पीताम्बर पहनें तब बीच में लांघ होना जरूरी है।  इसी प्रकार पालथी मारकर पूजा कर सकते हैं ... Read More »