Monthly Archives: April 2016

महावीर बनकर दिखाएँ

महापुरुष, अवतार और देवी-देवताओं से लेकर परमात्मा की शक्तियाँ और दिव्यताएँ पूरी तरह आत्मसात  करने और उनके अनुरूप जीवन को ढालने के लिए हैं। उत्सव-पर्व, जयंतियां, निर्वाण दिवस और साल भर चलते रहने वाले आयोजनों का यही मकसद है ताकि ऊध्र्वदैहिक यात्रा के लिए जरूरी जीवनीशक्ति, सद्चरित्र और कल्याणकारी प्रेरणाओं का संचरण अनवरत पूरे प्रवाह के साथ बना रहे और सृष्टि ... Read More »

वागड़ यात्रा : रामभरोसे हिन्दू होटल – दुर्लभ हो गया है यह नाम

आम तौर पर रामभरोसे हिन्दू होटल, शंकर विजय होटल जैसे नाम आजादी से पहले और कुछ दशक बाद तक प्रचलित रहे लेकिन अब ये नाम दुर्लभ हो गए हैं। आरंभिक दौर में इन नामों से स्थापित वाली होटलों में दीवारों पर देवी-देवताओं और मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों वाली श्रृंखलाबद्ध सुन्दर सी फ्रेम में जड़ी तस्वीरें लगा करती थी । चाय आने ... Read More »

देव दर्शन

कामदा एकादशी पर चौबीसों का पाड़ला (बांसवाड़ा) स्थित प्राचीनतम सत्यनारायण भगवान के श्रीचरणों में नमन का सौभाग्य Read More »

जानें अपनी औकात

दुनिया में भगवान की सर्वोत्कृष्ट कृति है मनुष्य। ईश्वर ने मनुष्य के रूप में अवतार लेकर जगत का कल्याण किया है और दुष्टों का संहार कर धर्म की स्थापना की। पूर्णावतार, अंशावतार, लीलावतार आदि के रूप में भगवान की लीलाओें से शास्त्र और पुराण भरे हुए हैं। इसके अलावा कई दैवीय कार्य भगवान मनुष्यों के माध्यम से पूर्ण करवाता है। ... Read More »

बेफिक्र रहें एकतरफा शत्रुता से

भगवान की बनायी दुनिया और उसकी माया खूब निराली है। जो लोग दुनिया में आए हैं उन्हें दुनियादारी करनी ही है और फिर उस जगह लौटना भी है जहां से आए हैं। इस पूरी यात्रा में असंख्य पड़ावों, घुमावदार रास्तों और श्रृंग-गर्त भरे क्षेत्रों से होते हुए आदमी जाने कितने सफर तय करता हुआ अपने मुकाम को पाने  के लिए ... Read More »

मुर्दों की तरह न रहें, मुस्कराना भी सीखें

जिन्दगी की आपाधापी और ऎषणाओं की अंधी दौड़ में आदमी नैतिक मूल्यों और मानवीय आदर्शों के  साथ सबसे ज्यादा जिस बात को भुला चुका है वह है मुस्कान।  बहुसंख्य लोगों के चेहरों से मुस्कान गायब है। ये हमेशा मुँह फुलाये रहते हैं। जो लोग हमेशा भयग्रस्त, गंभीर और गमगीन रहते हैं उनसे लोग सायास दूरी बनाए रखते हैं।  जीवन में ... Read More »

निष्काम लोकमंगल अपनाएं

परिवेश में जो परिवर्तन लाने के लिए यह जरूरी है कि हमारे मन में इसके लिए स्वस्थ और सकारात्मक बीजों का अंकुरण हो। चित्त की भावभूमि शुद्ध और परोपकारी दृष्टि से युक्त होती है तभी लोक मंगल की भावनाओं का सृजन बिंब पाने लगता है। वैचारिक शुद्धता के साथ लक्ष्यों की पवित्रता भरी भावभूमि जितनी अधिक निर्मल, स्वच्छ और लोकमंगल ... Read More »

सिद्धावस्था पाने देह तृप्ति अनिवार्य

परमात्मा का दिया हुआ दुर्लभ मानव शरीर ही हमारा वह साधन-पात्र है जिसके माध्यम से हम पहले दिव्यत्व और उसके बाद दैवत्व की सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि अधिकांश लोगों को जन्म लेने के बाद संसार की माया इस कदर अपने पाशों में जकड़ लिया करती है कि उन्हें यह तक पता नहीं होता कि वे क्यों आए हैं, ... Read More »

लेखन में अपनाएँ मौलिकता और सच्चाई

बहुत कुछ छपता है जो उनका नहीं होता जिनके नाम से छपा है। लिखने वाले भी हैं और लिखवाने वाले भी बहुत हैं।  नगण्य होंगे जो भलमनसाहत में किसी के भी आग्रह को टाल नहीं पाते, किसी के लिए भी जो सामने वाले चाहते हैं, वैसा लिख डालते हैं।अधिकांश लिखने-लिखवाने वाले हैं जिनमें दोनों पक्षों में चतुर भी हैं, शातिर ... Read More »

व्यवहार में लाएं मानव धर्म

बातें तो हम सभी इंसानियत की करते हैं और इन्हीं पर भाषण-उपदेश झाड़ते रहते हैं। लेकिन असल में हम कितने फीसदी इंसानियत अपना रहे हैं, इस एक मात्र प्रश्न का जवाब हम तलाश लें तो हमारे जीवन की सारी सच्चाई सामने आ जाए। इंसान किसी भी जात-पात या धर्म-सम्प्रदाय का हो, चूंकि पहले वह मनुष्य है इसलिए उसके लिए मानव धर्म ... Read More »