Monthly Archives: March 2016

होली पर विशेष – होना चाहिए खात्मा होलिकाओं और हिरण्यकश्यपों का

उस जमाने में दानवी संस्कृति के परिचायक हिरण्यकश्यप भी थे और सत्ता के मद भरी फायरप्रूफ होलिकाएं भी। अंधे मोह और मद भरी कुर्सियों का वजूद तब भी था और अब भी है। अन्तर सिर्फ इतना भर हो गया है कि तब एक हिरण्यकश्यप था, एक होलिका थी। आज कई शक्लोें और लिबासों में हिरण्यकश्यपों की जमातें हैं, कुर्सी को ... Read More »

मूर्तियों की भी तो सुनें

यों तो मूर्तियों से पूरा संसार भरा हुआ है। तरह-तरह की मूर्तियां विद्यमान हैं। कुछ लोग मूर्तिवत हैं और कुछ मूर्तियां जीवन्तता देती रही हैं। मूर्तियों के भी कई सारे भेद जमाने में दिखने लगे हैं। कुछ पूजनीय हैं, कुछ दर्शनीय हैं, कई प्राण प्रतिष्ठित हैं और ढेरों ऎसी हैं जिनमें प्राण तत्व का आभास तक नहीं होता। कई प्राणहीन ... Read More »

कष्टकारी है मुखौटों के बीच जीना

भगवान का दिया हुआ चेहरा आदमी पर नज़र नहीं आता। जिधर देखें उधर आदमी का वह चेहरा नज़र नहीं आता जो उसका अपना हुआ करता था, जिसे देख कर उसे प्रसूत करने वाली माँ खुश हुआ करती थी, पिता भी बार-बार मचलता था उसे देखने। उसे देखते ही घर-परिवार के लोगों को भी भरोसा हो जाता था कि यह अपना ... Read More »

छुट्टियों के हत्यारे …

संसार दो तरह के लोगों में धु्रवीकृत है। एक वे हैं जो कहते हैं कि मरने तक की फुर्सत नहीं है, दूसरे लोगों से पूछो तो कहेंगे टाईमपास कर रहे हैं।  दोनों किस्मों को आदर्श नहीं माना जा सकता क्योंकि ये सारे लोग टाईम मैनेजमेंट में विफल हैं। टाईम पास करने वाले भी, और टाईम कील करने वाले भी। मनुष्य ... Read More »

छाया चाहें तो प्रकृति का सम्मान करें

छाया का महत्व हर इन्सान से लेकर प्राणी मात्र के लिए विशिष्ट है, छत्रछाया में जो पल्लवित होता है वह सुरक्षित विकास की सारी संभावनाओं को आकार देता है।  छाया हर मामले में सुरक्षित व संरक्षित जीवन देती है, यह छाया माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी से लेकर बुजुर्गों, गुरुओं और उन सभी की हो सकती है जो हमें स्नेह आशीर्वाद प्रदान ... Read More »

अपनी मौलिकता बनाए रखें

जो हम हैं वह हैं ही, यह हमारी मौलिकता ही है कि हम ‘हम’ हैं। परमात्मा ने जैसा शरीर, मन और बुद्धि प्रदान की है उसी के अनुरूप साँचे में ढले हुए हैं। जैसे भी हम हैं वैसे हैं क्योंकि दुनिया में भगवान ने हर इंसान को अन्यतम मौलिक स्वरूप और गुणधर्म प्रदान किया है। फिर किसी के अच्छा कहने ... Read More »

जो भौंकेगा वही भोगेगा

आदमियों की जात में कई किस्में हैं। दुनिया में आदमी की जितनी प्रजातियाँ हैं उतनी किसी और की नहीं। कुछ आदमी अपनी आदमियत से जाने-पहचाने जाते हैं जबकि बहुतरे अपनी अजीबोगरीब हरकतों की वजह से। आप गौर करें तो पाएंगे की अपने आस-पास की आदमियों की कई-कई रोचक किस्में विद्यमान हैं। इनमें बहुसंख्य तो ऎसे हैं जिनका केवल जिस्म ही ... Read More »

अनुभव – अजब-ग़ज़ब हैं मूर्खो के अंधविश्वास

हम इन दिनों अजीब सी मनःस्थिति में जी रहे हैं। हम भगवान, अपने कर्म या किसी इंसान पर विश्वास भले न कर सकें, अंधविश्वासों पर हमारा अगाध विश्वास हमेशा बन जाता है और यह जीवन की उस बुराई में शामिल हो जाता है जो हमारी मृत्यु तक हमारे साथ बनी रहती है। कुछ लोगों में यह अंधविश्वास रहता है कि ... Read More »

पहले जरूरतों का ख्याल, बाद में मनोरंजन की बात

आदमी की बुनियादी सुख-सुविधाओं और क्षेत्र की आधारभूत जरूरतों के बारे में चिन्तन और कार्य सबसे पहले होना चाहिए। इसके बाद सारे दूसरे काम। जहाँ जरूरतों को प्राथमिकता दी जाती है वहाँ मनोरंजन भी अपने उद्देश्यों में सफल होता है और इसका प्रभाव जनमानस बहुत बाद तक अनुभव करता है। दूसरी स्थिति में जहाँ मनोरंजन को प्रधानता देकर आदमी के ... Read More »

मस्ती चाहें तो स्वाभिमान न छोड़ें

जीवन का सबसे बड़ा दर्शन है आनंद से जीवनयापन और मानवीय लक्ष्यों की पूर्णता। इसके लिए विभिन्न मार्ग हैं जिन पर चलकर आनंदमय जीवन जीया जा सकता है।  एक मार्ग परम्परा से चला आ रहा है और वह है ईश्वरीय विधान को सहजता से प्रसन्नतापूर्वक अपनाते हुए स्वाभिमान से जीना और व्यक्तित्व में उन गुणों का समावेश करना जिनके माध्यम ... Read More »