जय राणा प्रताप की …

जय राणा प्रताप की …

दुनिया आज प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की जयन्ती मना रही है। प्रताप किसी वर्ग, जाति, सम्प्रदाय, भौगौलिक क्षेत्र, परिधियों आदि किसी भी प्रकार की संकीर्णताओं से बंधे नहीं थे।

प्रताप वैश्विक महापुरुष रहे हैं और जिनसे पूरी दुनिया शौर्य, वीरता, साहस, देशभक्ति, त्याग, तपस्या और पराक्रम की प्रेरणा पाती हैं। प्रताप का वैश्विक व्यक्तित्व और दिव्य कर्मयोग ही है कि जिसके कारण आज भी महाराणा प्रताप का नाम लेने मात्र से रगों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र हिलोरे लेने लगता है।

प्रताप का महा तेजस्वी और दिव्य ओज से परिपूर्ण चेहरा आज भी हर किसी के जेहन में आते ही चमत्कार का अहसास करा देता है। कली-कली खिलकर देशभक्ति का अजस्र स्रोत बहाने लगती है।

हम सालों से महाराणा प्रताप की जयन्ती और पुण्य तिथि मनाते आ रहे हैं, महाराणा प्रताप  के जीवन और कर्म से संबंधित स्थलों की सैर करते रहे हैं, उनके समग्र जीवन से संबंधित संग्रहालयों में जा-जाकर सैकड़ों चित्रों को निहारते रहे हैं, उनकी गाथाओं को सुनते आ रहे हैं और साल भर में उनके नाम पर जाने कितने सारे आयोजन कर डालते हैं।

और हर अवसर तथा आयोजन के वक्त हम महाराणा प्रताप का नाम ले लेकर प्रतिज्ञाएं लेते हैं, उनकी देशभक्ति से प्रेरणा पाकर समाज और देश के लिए कुछ करने के संकल्प लेते हैं और इतने अधिक भाषण झाड़ते हैं जैसे कि हम ही बचे हैं महाराणा प्रताप के सिद्धान्तों और कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए।

हम अपनी ओजपूर्ण और लच्छेदार भाषणकला से लोगों को इस कदर मंत्रमुग्ध कर दिया करते हैं जैसे कि महाराणा प्रताप के पदचिह्नों पर चलने वाले हम कुछ लोग ही बचे हुए हैं।

जितना अधिक प्रभावी वक्ता उतना अधिक जोर-शोर और ओज-तेज से महाराणा प्रताप के बारे में पूरे जोश और उत्साह का दिग्दर्शन कराता हुआ भाषण झाड़ता है और श्रोताओं को प्रभावित करने की हरचन्द कोशिश करता है।

हम सभी किस्मों के वक्ताओं और श्रोताओं की भीड़ प्रताप जयन्ती और पुण्यतिथि अथवा प्रताप से संबंधित अवसरों और स्थलों पर जुटती रही है।

जानें कितने ही बरसों से हम महाराणा प्रताप के नाम पर आयोजनों में रमते रहे हैं। और जिस तरह से हम संकल्प लेते हैं, प्रताप के उपदेशों और कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पूरे जोश-खरोश से भाषण झाड़ते हैं उसमें यदि थोड़ी सी भी ईमानदारी होती तो हमारा देश आज कहाँ से कहाँ पहुंच जाता।

हम लोग महापुरुषों को केवल आयोजनीय आनंद, चन्द स्वनामधन्य अथवा नाम पिपासु अतिथियों की ऎषणा पूर्ति और अहंकार संतुष्टि, स्वागत, सत्कार और अभिनंदन आदि का पर्याय मानने में रम गए हैं इसलिए साल भर किसी न किसी महापुरुष की जयन्ती, पुण्य तिथि अथवा उनसे संबंधित अवसरों पर उनके बारे में कुछ न कुछ बोलते रहते हैं और अपनी वाणी से दुनिया भर को भरमाने की कोशिश करते रहे हैं कि हम ही हैं जिनके कारण इनका नाम और स्मरण बना हुआ है।

परन्तु हममें से किसी ने भी महापुरुषों को अपने जीवन में उतारने की कोशिश नहीं की। कुछ सच्चे और अच्छे लोग हो सकते हैं जो महापुरुषों को अपने जीवन में आंशिक या पूर्ण  रूप से उतारने की कोशिश करते हैं लेकिन ऎसे लोग सार्वजनिक मंचों और अवसरों पर डींगें नहीं हाँका करते।

इनके आचरण से ही पता चल जाता है कि इन लोगों ने कितनी अधिक ईमानदारी से महापुरुषों को आत्मसात किया है। सच में देखा जाए तो आचरणहीन भूसभुसेदार भाषणों का कोई असर नहीं होता। दो-चार घण्टे तक कानों में गूंज जरूर बनी रह सकती है लेकिन इसके बाद न कान में कुछ रह पाता है, न दिमाग या दिल में।

महाराणा प्रताप के बारे में भी ऎसा ही है। हम प्रताप के जीवन, व्यक्तित्व और शौर्यपूर्ण कर्मयोग को लेकर खूब सारी चर्चाएं करते रहते हैं लेकिन कभी यह प्रयास नहीं करते कि महाराणा प्रताप के जीवन की कोई सी एक घटना से सीख लेकर उसे अपने जीवन में उतारें।

महाराणा प्रताप ने जिन सिद्धान्तों, नैतिक चरित्र, मूल्यों और देशभक्ति के लिए त्याग, तपस्या, सादगी और सर्वस्व बलिदान के भाव अपनाए, उनसे में एक को भी हम अपने जीवन में अंगीकार करने को तैयार नहीं होते।

केवल भाषणों में ही हम प्रताप के जीवन चरित्र के बारे में बताते हुए फूले नहीं समाते। कोई भी इंसान यह नहीं कहता कि महाराणा प्रताप के जीवन से मैंने एकाध अच्छी बात ग्रहण की है और उसे जीवन में उतार रहा हूँ।

दुर्भाग्य यह है कि एयरकण्डीशण्ड घरों, वाहनों, प्रतिष्ठानों, कार्यस्थलों में रहने वाले, बिसलरी की बोतल के बिना जलग्रहण नहीं करने वाले, स्टार छाप होटलों, रेस्तराँ, रिसोर्ट्स और फार्म हाउसों में लजीज खान-पान, पीने-पिलाने का आनंद पाने वाले, गौ ब्राह्मण प्रतिपाल के परंपरागत सिद्धान्तों को भूल जाने वाले, आम इन्सानी संवेदनशीलता, दया, करुणा और मैत्री भाव से हीन हम लोग महाराणा प्रताप की केवल बातें करते हैं।

वातानुकूलित कक्षों, सभागारों और होटलों में बैठकर देश और समाज के लिए महाराणा प्रताप के योगदान की चर्चाएं करने वाले हम लोगों के जीवन चरित्र का मूल्यांकन किया जाए तो शर्मनाक स्थिति यही सामने आएगी कि हम लोग केवल प्रताप के नाम पर बातें करना ही जानते हैं, प्रताप को अपने जीवन में उतार नहीं पाए हैं।

वे लोग धन्य हैं जो महाराणा प्रताप की बातों, उपदेशों और उनके जीवन की घटनाओं से सीख लेकर सादगी भरा जीवन अपनाए हुए हैं, सभी प्रकार की पद-प्रतिष्ठा, कंचन-कामिनी, खुमारी, अहंकार, निजी स्वार्थ और अपने-पराये के भावों को त्याग कर समाज और देश की सेवा, परोपकार और परहित के लिए किसी न किसी रूप में अपना योगदान कर रहे हैं।

महाराणा प्रताप ने ताजिन्दगी सादगी, तप और कठोर जीवन को अपनाया लेकिन आज हम लोग इतने अधिक आरामतलबी हो गए हैं, भोग-विलास में डूबते जा रहे हैं, पद-पैसों और प्रतिष्ठा के लिए परस्पर गलाकाट स्पर्धा में डूबे हुए हैं, सामाजिक समरसता को छोड़कर पारिवारिक समृद्धि के लिए भागदौड़ करने में रमे हुए हैं, ऎसे में हमें महराणा प्रताप का नाम लेने का भी अधिकार नहीं है।

समाज और देश आज सुरक्षित नहीं है, देश के भीतर और बाहर के दुष्ट राष्ट्रभक्षियों, कुर्सीपूजकों के आडम्बरी व्यवहार और क्षुद स्वार्थों के लिए बिक जाने की प्रवृत्तियां हावी हैं, और महाराणा प्रताप के वंशज होने का दम भरने वाले हम सभी लोग चुपचाप सब कुछ देख रहे हैं।

आज यदि महाराणा प्रताप हमारे बीच होते तो हम सभी के छद्म व्यवहार, हमारी तथाकथित देशभक्ति और मातृभूमि के लिए समर्पण, कुटिलताओं और चाल-चलन को देखकर दुःखी ही होते।

अब तक जो हो गया, भूल जाएं। आज प्रण लें कि हम महाराणा प्रताप के जीवन चरित्र से कोई एक शिक्षा लें और उसे जीवन भर के लिए अपनाएं। तभी महाराणा प्रताप जयन्ती मनाना सार्थक है अन्यथा बरसो से जो कुछ चल रहा है वह निरर्थक औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं। प्रताप सभी के हैं इसलिए उनसे संबंधित हर अवसर पर हम सभी की समर्पित भागीदारी होनी चाहिए।

महाराणा प्रताप जयन्ती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ….।

आईये प्रताप के जीवन से कुछ सीखें और समाज तथा देश के लिए समर्पित होने का संकल्प लें।