छातीकूटिए अमर रहें

आज अगर छाती कूटने वालों की गणना शुरू हो जाए तो सभी जगह बहुत से लोग मिल जाएंगे जो बिना किसी कारण के छाती पीटते…

ये कभी न होंगे अपने …

अपने आस-पास ऎसे लोग बहुत बड़ी संख्या में विचरण करते रहे हैं जो अपनी पहचान कायम करने के फेर में वो सब कुछ कर रहे…

भटक गए हैं हम सब

वर्तमान पीढ़ी के शारीरिक सौष्ठव को देख कर कहीं नहीं लगता कि हम स्वस्थ और मस्त हैं। अति दुर्बल या अति स्थूल होती जा रही…

हमसे बड़ा आवारा कौन ?

पिछले कुछ दशकों से आवारा पशु हर जगह कुछ-कुछ दिन में चर्चाओं में आते रहे हैं। आवारा से सीधा अर्थ निकलता है अनियंत्रित, मर्यादाहीन, उन्मुक्त…

न अटकें, न भटकें

प्रतिक्रिया एक ऎसा शब्द है जो जीवन भर हर कर्म और विचार में समाया रहता है। कर्मयोग की विभिन्न धाराओं और उपधाराओं में प्रतिक्रिया न…