यों पाएं आशातीत सफलता

सांसारिक कर्म और फल प्रत्यक्ष होते हैं जबकि आध्यात्मिक कर्म का फल अप्रत्यक्ष होता है इसलिए सांसारिकों के जीवन की पहली प्राथमिकता सांसारिक कर्म, दैहिक आनन्द और भोग होती है। प्रत्येक प्राणी अपने समग्र जीवन में सम्पूर्ण सफलता और समृद्धि चाहता है और सारे कर्म इसीलिए करता है। और ऎसे में वह पुरुषार्थ चतुष्टय के दो आधारों काम और अर्थ ... Read More »

जो खुलेगा, वही खिलेगा

इंसान की जिन्दगी पुष्प की तरह है। उसकी गंध और सौन्दर्य तभी अनुभव में आ सकता है जब वह कली के रूप में पूर्ण यौवन भी प्राप्त करे और पूरी स्फूर्ति के साथ उपरान्त खिले। तभी उसकी सुन्दरता और सुगंध जमाने भर को प्रभावित कर सकती है। कोई सा पुष्प चाहे कितना दुर्लभ हो, वह यदि कली ही न बन ... Read More »

देश के दुश्मन हैं ये

मर्यादाओं, संस्कारों और परंपराओं का ह्रास होता है और अपने स्वार्थ और ऎषणाओं के अनुरूप जब परिभाषाएं गढ़ी जाती हैं तब प्रकृति और परमेश्वर भी अपना साथ छोड़ देते हैं और वह सब कुछ होने लगता है जो नहीं होना चाहिए। पेड़-पौधों, जड़-जंगम और दूसरे जीवों को छोड़कर इंसान अब अपनी सारी की सारी मर्यादाओं और मौलिक संस्कारों को भुलाकर ... Read More »

स्मृति शेष – कमला बा

जीवन और जगत के व्यवहारिक ज्ञान-अनुभवों की सदानीरा वागड़ अंचल में आधे आसमाँ की पुरानी पीढ़ी में बहुमुखी विलक्षणताओं की बदौलत अपनी अन्यतम पहचान रखने वाली महिलाओं में ख़़ास किरदार रही श्रीमती कमला बा के निधन की खबर शोक और दुःख का अनुभव कराने वाली रही। श्रीमती कमला बा जीवन के सभी पक्षों के ज्ञान और अनुभवों की वह दादी-नानी ... Read More »

बचें-बचाएँ सर्द हवाओं से

मौसम का मिजाज बहुत कुछ बदला हुआ है। कहीं खौफनाक मंजर है और कहीं सुप्तावस्था सुहानी लगने लगी है। हवाओं और बादलों की जुगलबन्दी का यह दौर अजब-ग़ज़ब ढाने लगा है। बदहवास चक्रवातों का दौर परवान पर है और शीतल से शीतल तीखी बयारों ने जीना दुश्वार कर दिया है। किसी ने यह कल्पना तक नहीं की थी सूरज पर ... Read More »

अभिशप्त होते हैं ऎसे सम्मान और पुरस्कार, अर्थहीन होती है तारीफ

तारीफ, छपास, सम्मान, अभिनंदन और पुरस्कार ऎसे शब्द हैं जो हर इंसान के लिए महत्वपूर्ण हैं और दुनिया के अधिकांश लोग इन्हीं के दीवाने होकर पीछे पागलों या आधे पागलों की तरह भटकते देखे जा सकते हैं। आजकल यों भी आदमी जो कुछ करता है वह औरों के लिए, समाज और देश के लिए नहीं करता, बल्कि खुद की प्रशस्ति ... Read More »

ढपोड़शंखी शोर पीपों और गगरियों का

जो भरा हुआ है वह इतना भारी होता है कि उसे अपने अस्तित्व और प्रभाव को साबित करने के लिए किसी भी प्रकार के शोरगुल, प्रोपेगण्डा और हरकतों का सहारा लेना नहीं पड़ता। उसकी मौजूदगी ही अपने आप में काफी है। भावों, संस्कारों, आदर्शों और मूल्यों से जो भरा हुआ है उसका हर कर्म खुद ब खुद बोलने लगता है ... Read More »

न घास डालें, न गुलाबजामुन परोसें

हममें से बहुत बड़ी संख्या में लोग हैं जो मानसिक स्तर पर इतने अधिक संवेदनशील और धीर-गंभीर हैं कि हमारे बारे में कोई भी थोड़ा-बहुत कुछ भी कह दे तो हम  तनावग्रस्त होकर परेशान हो जाते हैं और घण्टों व कई-कई दिनों से लेकर महीनों तक यही सोचते रहते हैं कि आखिर ऎसा क्यों कहा, किस कारण से कहा होगा ... Read More »

भला करे इंसान, बुरा करे वो हैवान

भलाई करना भगवान का काम है और काम बिगाड़ना राक्षसों का।  इस मामले में दुनिया में मनुष्यों की कुल दो प्रकार की प्रजातियां ही मानी जानी चाहिएं। जो लोग नेक-नीयत रखते हुए ईमानदारी से काम करते हैं, परिश्रम से प्राप्त कमाई से जीवन चलाते हैं और दूसरों की भलाई के कामों में किसी न किसी रूप में हाथ बँटाते हैं, ... Read More »